सत्ता का ‘हक्का-पानी’ बंद, तो अपनों के खिलाफ ही जंग? रामखेलावन पटेल के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश?

मध्य प्रदेश की राजनीति में वफादारी और अवसरवाद के बीच की लकीर अब धुंधली होती जा रही है। आज हम बात कर रहे हैं अमरपाटन के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल की। सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक नेता की निष्ठा सिर्फकमीशनऔरसत्ता के सुखतक सीमित होती है? क्या शहडोल के पूर्व प्रभारी मंत्री रहे पटेल अब अपनी ही सरकार के राजस्व पर चोट कर रहे हैं?

सियासत के गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि रामखेलावन पटेल का असली चेहरा अब सामने रहा है। जब तक वे शहडोल के प्रभारी मंत्री थे, तब तक रेत की खदानों से लेकर हर छोटेबड़े खनन कार्य मेंकमीशनका खेल कथित तौर पर बदस्तूर जारी था। लेकिन जैसे ही सत्ता का हाथ सिर से हटा औरऊपरी कमाईका हक्कापानी बंद हुआ, पूर्व मंत्री जी के सुर बदल गए।

ग्राफिक्स और विजुअल्स (Text on Screen):

  • प्रभारी मंत्री रहतेकमीशनका आरोप?
  • अमरपाटन की खदानों पर जनता को उकसाने का खेल?
  • सरकारी राजस्व को चूना लगाने की साजिश?

हैरानी की बात यह है कि जो रामखेलावन पटेल भाजपा के झंडे तले मंत्री बने, आज वही अपनी ही सरकार के कामकाज में रोड़ा अटका रहे हैं। अमरपाटन की खदानों पर जनता को उकसाकर काम रुकवाना, सीधे तौर पर शासन के राजस्व को नुकसान पहुँचाना है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई जनआंदोलन नहीं, बल्कि अपनी खोई हुई सियासी जमीन औररसूखको वापस पाने की छटपटाहट है।

इतिहास गवाह है किमहाराजको जबजब लगा कि उनकी दाल नहीं गल रही, उन्होंने पाला बदलने में देर नहीं की। पार्टी के भीतर रहकर पार्टी के ही खिलाफ काम करना उनकी पुरानी कार्यशैली रही है। ऐसे में बड़ा सवाल भाजपा आलाकमान के लिए हैक्या ऐसेअवसरवादीनेताओं को दोबारा टिकट देकर पार्टी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारेगी? या फिर बगावत के डर से एक बार फिर उसी चेहरे पर दांव लगाया जाएगा जिसने पार्टी की साख को दांव पर लगा दिया है?

रामखेलावन पटेल का यह दोहरा रवैया क्षेत्र की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि भाजपा नेतृत्व इसअनुशासनहीनतापर क्या एक्शन लेता है।

 

  • palak jain

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