IPS अधिकारी सुनील मेहता ने मांगा VRS, पुलिस मुख्यालय ने फिलहाल प्रस्ताव रोका; पारिवारिक कारणों का दिया हवाला

मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और प्रमोटी आईपीएस सुनील मेहता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन देकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। वर्तमान में इंदौर में डीआईजी (जोन-4) के पद पर तैनात सुनील मेहता ने अपने आवेदन में पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए सेवा से मुक्त किए जाने की मांग की है। हालांकि, पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने फिलहाल उनके आवेदन को मंजूरी नहीं दी है और प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया है।

सूत्रों के अनुसार, सुनील मेहता करीब चार साल पहले भी VRS लेने की इच्छा जता चुके थे, लेकिन उस समय मामला आगे नहीं बढ़ पाया था। हाल ही में उन्होंने दोबारा आवेदन प्रस्तुत किया। यदि पुलिस मुख्यालय इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो इसके बाद मामला राज्य सरकार के पास जाएगा। अंतिम निर्णय राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा।

अपने आवेदन में सुनील मेहता ने लिखा है कि उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां लगातार बढ़ गई हैं और पुलिस सेवा की व्यस्तता के कारण वे परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि उनके और उनकी पत्नी दोनों के परिवार में बुजुर्ग सदस्य हैं, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी उन पर है। ऐसे में उन्होंने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

सुनील मेहता वर्तमान में इंदौर जोन-4 के डीआईजी के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे सीधी जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) भी रह चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच और कानून-व्यवस्था को लेकर उनके फैसले चर्चा में रहे। वर्ष 2021 में एक व्यापारी के साथ कथित मारपीट और पुलिस अधिकारियों द्वारा वाहन चेकिंग के दौरान विवाद का मामला भी सामने आया था, जिसमें बाद में उन्हें पुलिस मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। हालांकि वर्तमान VRS आवेदन का उस प्रकरण से कोई आधिकारिक संबंध नहीं बताया गया है।

प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी IPS अधिकारी के VRS आवेदन पर सबसे पहले पुलिस मुख्यालय स्तर पर विचार किया जाता है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाता है। राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद ही अधिकारी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रदान की जाती है। यदि किसी स्तर पर आवेदन लंबित रहता है, तो अधिकारी को नियमित सेवा जारी रखनी होती है।

फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस मुख्यालय के अगले फैसले पर टिकी हैं। यदि आवेदन मंजूर होता है तो यह मध्य प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों में हाल के वर्षों का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम माना जाएगा। वहीं, यदि प्रस्ताव लंबित रहता है या अस्वीकार किया जाता है, तो सुनील मेहता को अपने वर्तमान पद पर सेवाएं जारी रखनी होंगी।

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gaurav singh rajput

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