
सार
लहार से भाजपा विधायक अमरीश शर्मा ‘गुड्डू भैया’ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शासकीय अध्यापकों और शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET से छूट देने की मांग की है। विधायक ने कहा कि इन शिक्षकों ने तत्कालीन नियमों के तहत नियुक्त होकर 15 से 20 वर्षों तक सेवा की है, ऐसे में लंबे सेवाकाल के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए।
विस्तार
लहार विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक अमरीश शर्मा ‘गुड्डू भैया’ ने शिक्षकों से जुड़े मुद्दे को शासन स्तर तक पहुंचाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। विधायक ने पत्र के माध्यम से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शासकीय अध्यापकों और शिक्षकों को अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET से छूट देने का अनुरोध किया है।
विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि लहार विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पिछले 15 से 20 वर्षों से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं और विद्यार्थियों को पढ़ाने का कार्य किया है।
अमरीश शर्मा ने कहा कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू शासकीय नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत हुई थीं। ऐसे में वर्षों तक सेवा देने के बाद दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने की अनिवार्यता को उन्होंने अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
विधायक ने मुख्यमंत्री से कहा कि वरिष्ठ शिक्षकों के लंबे सेवाकाल, अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें TET की अनिवार्यता से मुक्त रखने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के हितों और उनके सम्मान की रक्षा हो सकेगी।
शिक्षकों के इस मुद्दे को शासन स्तर तक पहुंचाने के लिए लहार विधानसभा क्षेत्र के अध्यापकों और शिक्षकों ने विधायक अमरीश शर्मा के प्रति आभार जताया है। अब शिक्षकों की नजर शासन की ओर से इस मांग पर लिए जाने वाले निर्णय पर है।
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