
आज हम मध्य प्रदेश के उस विभाग की परतें उधेड़ने जा रहे हैं, जिसने भ्रष्टाचार के मामले में प्रदेश के कुख्यात ‘व्यापम घोटाले’ को भी कई कदम पीछे छोड़ दिया है। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित की। जब सिस्टम के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, जब आईएएस अफसर और एक संविदा चार्टर्ड अकाउंटेंट मिलकर करोड़ों-अरबों के वारे-न्यारे करने लगें, और जब एक अपराधी को जेल भेजा जाए लेकिन दूसरे रसूखदार अपराधी को फर्जी बैंक गारंटी बदलने का वीआईपी मौका दिया जाए—तो समझ लीजिए कि दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
ब्रांडवाणी समाचार के पिछले खुलासों के बाद से जल निगम के वातानुकूलित कमरों में पसीने छूट रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अफसरों और सीए भावना भारती के बीच बंद कमरों में पत्रावलियों और नोटशीट को बदलने का गंदा खेल चल रहा है। लेकिन ब्रांडवाणी समाचार बिना पुख्ता प्रमाण के कोई बात नहीं कहता। आज हम दस्तावेजों के साथ यह साबित करेंगे कि कैसे जल निगम में 130 करोड़ से अधिक की फर्जी बैंक गारंटी का नया खेल खेला गया और कैसे जांच एजेंसियां—ईओडब्लू (EOW), लोकायुक्त, ईडी (ED) और सीबीआई (CBI)—अब इस पूरे सिंडिकेट पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही हैं। आइए देखते हैं यह विशेष रिपोर्ट।”
फर्जी बैंक गारंटी का पार्ट-2, 130.42 करोड़ का ‘वीआईपी‘ घोटाला
मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि यहां नियम इंसान की हैसियत देखकर बदले जाते हैं। मैसर्स तीर्थ गोपीकॉन लिमिटेड (इंदौर) के 35.80 करोड़ रुपये के फर्जी बैंक गारंटी (पीएनबी कोलकाता) मामले को तो हमने पहले ही उजागर किया था, जिसमें कंपनी के मालिक को तो जेल भेज दिया गया है। लेकिन अब ब्रांडवाणी समाचार के हाथ लगे दस्तावेजों ने एक और महाघोटाले की पोल खोल दी है।
यह मामला है ‘एमपी बावरिया सूरत’ और ‘अंकिता कंस्ट्रक्शन अहमदाबाद’ के जॉइंट वेंचर का। इस जॉइंट वेंचर द्वारा एसबीआई वेस्ट बंगाल (SBI West Bengal) और बैंक ऑफ बड़ौदा कोलकाता (Bank of Baroda Kolkata) की कुल 130.42 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी विभाग में जमा की गई। जब इन गारंटियों की पड़ताल हुई, तो ये भी पूरी तरह से फर्जी (Fake BG) निकलीं।
न्याय का दोहरा चरित्र और अफसरों की ‘सेटिंग‘
अब यहां से शुरू होता है जल निगम के प्रबंध संचालक (एमडी) और सीए भावना भारती की रहस्यमयी मेहरबानी का खेल। नियमत, फर्जी बैंक गारंटी पकड़े जाने पर तत्काल एफआईआर होनी चाहिए थी, टेंडर निरस्त होना चाहिए था और संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर जेल भेजना चाहिए था, जैसा कि तीर्थ गोपीकॉन के मामले में किया गया।
लेकिन एमपी बावरिया सूरत और अंकिता कंस्ट्रक्शन पर गजब की कृपा बरसी। एफआईआर और जेल तो दूर की बात, विभाग के आला अधिकारियों ने इस कंपनी को अपनी फर्जी बैंक गारंटी बदलने का सुनहरा अवसर दे दिया। अप्रैल, मई, जून और जुलाई के महीनों में गुपचुप तरीके से नई बैंक गारंटियां जमा करवा ली गईं। ब्रांडवाणी समाचार सीधा सवाल पूछता है: जल निगम में यह कैसी ‘सेटिंग’ चल रही है? एक चोर को जेल और दूसरे रसूखदार चोर को वीआईपी ट्रीटमेंट? क्या 130.42 करोड़ रुपये का यह फर्जीवाड़ा किसी को नजर नहीं आया, या इस हमाम में सब नंगे हैं? 88.88 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी और बाकी का पैसा मोबिलाइजेशन एडवांस के नाम पर कैसे एडजस्ट कर दिया गया, यह अपने आप में एक बड़ा वित्तीय अपराध है।
10 साल से जमी सीए भावना भारती, आखिर किसकी शह पर?
इस पूरे सुनियोजित खेल की धुरी बनी हुई हैं सीए भावना भारती। ब्रांडवाणी समाचार के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, भावना भारती को वर्ष 2017 में जल निगम में संविदा भर्ती नियमों के तहत नियुक्त किया गया था। मध्य प्रदेश के संविदा नियमों के अनुसार, किसी भी संविदा कर्मचारी को अधिकतम 5 साल तक ही सेवा में रखा जा सकता है।
लेकिन आज एक दशक 10 साल बीत जाने के बाद भी सीए भावना भारती को उनके पद से क्यों नहीं हटाया गया? आखिर वह कौन सी ‘जादू की छड़ी’ या ‘अदृश्य शक्ति’ है जो उन्हें नियमों के विरुद्ध जाकर इतने वर्षों से उसी कुर्सी पर जमाए हुए है? जब एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) में उनके द्वारा 2014-15 और 2015-16 में भारी गड़बड़ियां की गईं, ₹1,226.83 करोड़ की जगह ₹2,475.21 करोड़ का अनुदान दर्शाया गया, जिसके कारण आयकर विभाग ने ₹348.79 करोड़ की रिकवरी निकाल दी और विभाग के खाते फ्रीज़ हो गए—तब भी उन्हें सजा देने के बजाय जल निगम में पनाह दे दी गई। एनएचएम में अरबों का नुकसान कराने वाली सीए को जल निगम में बैठाकर दो-दो इंक्रीमेंट से नवाजा जाना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यह कोई सामान्य भूल नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट है।
आबकारी अधिकारी 2.5 करोड़ में सस्पेंड, और यहां 130 करोड़ पर इंक्रीमेंट?
सिस्टम का यह दोहरा चरित्र आम जनता और ईमानदार कर्मचारियों के मुंह पर तमाचा है। हाल ही में हमने देखा कि दीपम राय चूरा जैसे आबकारी अधिकारी को मात्र 2.5 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के आरोप में तत्काल निलंबित कर दिया गया। एक आम कर्मचारी की छोटी सी गलती पर उसका वेतन रोक दिया जाता है। लेकिन जल निगम में 35.80 करोड़ और 130.42 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटियों का खेल बेखौफ चल रहा है, और न तो जल निगम के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है, न ही सीए भावना भारती पर। क्या कानून सिर्फ छोटे कर्मचारियों के लिए बना है? क्या बड़े अधिकारियों और उनके चहेते सीए के लिए कोई अलग संविधान है?
घबराए अधिकारी कर रहे सबूत मिटाने की कोशिश?
ब्रांडवाणी समाचार सूत्र बताते हैं कि जब से हमारे न्यूज़ पोर्टल ने इस घोटाले की पहली किस्त प्रकाशित की है, जल निगम मर्यादित भोपाल के मुख्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। प्रबंध संचालक, संबंधित अधिकारी, सीए भावना भारती और ऑडिट की पूरी टीम दिन-रात एक करके पुरानी पत्रावलियों और नोटशीट में अपनी कमजोरियों को दुरुस्त करने में लगी हुई है। पन्नों को बदलने और लीपापोती करने की जद्दोजहद जारी है।
लेकिन ब्रांडवाणी समाचार इस भ्रष्ट तंत्र को साफ कह देता है की , सरकारी पत्रावलियों और नोटशीट पर जो दर्ज हो चुका है, उसे मिटाना इतना आसान नहीं है। हमारे पास हर एक दस्तावेज की प्रमाणित प्रतियां सुरक्षित हैं। यह केवल दो फर्जी बैंक गारंटियों का मामला नहीं है, जल निगम मर्यादित की तिजोरी में ऐसे कई और गहरे राज दफन हैं, जिनके पुख्ता प्रमाण ब्रांडवाणी समाचार के पास मौजूद हैं। आने वाले दिनों में हम उन चेहरों को भी बेनकाब करेंगे जो पर्दे के पीछे से इस पूरे सिंडिकेट को चला रहे हैं।
जल्द होगी जांच एजेंसियों (ED, CBI, EOW) की धाकड़ एंट्री
जल निगम का यह पूरा फर्जीवाड़ा धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), पद के दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र का एक स्पष्ट मामला है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि बहुत जल्द मध्य प्रदेश के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और लोकायुक्त के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसियां, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), इस पूरे मामले में प्रवेश करने वाली हैं।
जब केंद्रीय एजेंसियां इस 130.42 करोड़ और 35.80 करोड़ के फर्जी बैंक गारंटी सिंडिकेट की फाइलें खोलेंगी, तो कई सफेदपोश अधिकारियों, बड़े नेताओं और बिचौलियों के चेहरों से नकाब उतरेगा। आईसीएआई (ICAI) को भी इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सीए भावना भारती का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर पेशेवर कदाचार का अत्यंत गंभीर मामला है। यदि कोई साधारण व्यक्ति करता तो फर्जीवाड़ा धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) कहलाता और माननीय न्यायालय उसको सजा दे देते लेकिन जल निगम के अधिकारियों द्वारा किया गया तो इस पर प्रोत्साहन मिल रहा है देखना है मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ज़ीरो टालरन्स की नीति यहा लगती है या नहीं।
“विपक्ष जो आम जनता के मुद्दे उठाने का दावा करता है, वह इस महाघोटाले पर मौन क्यों है? क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व इस संगठित लूट पर संज्ञान लेगा? मध्य प्रदेश की जनता यह देख रही है कि उनके खून-पसीने की कमाई को कैसे फर्जी बैंक गारंटियों और मोबिलाइजेशन एडवांस के नाम पर लूटा जा रहा है।
जल निगम मर्यादित आज की तारीख में भ्रष्टाचार का वह केंद्र बन चुका है जिसने व्यापम को भी शर्मसार कर दिया है। ब्रांडवाणी समाचार की शासन और प्रशासन से दो-टूक मांग है कि इस पूरे मामले की बिना किसी देरी के ईडी और सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए। जब तक भ्रष्ट अधिकारियों और इस सुनियोजित लूट में शामिल हर एक चेहरे को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, हमारी यह खोजी मुहिम जारी रहेगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस बेबाक और निर्भीक लड़ाई में देखते रहिए सिर्फ ब्रांडवाणी समाचार। नमस्कार।”






