
सार
देवेश शर्मा|मैहर। जिले के भटूरा क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ खनन कारोबारियों द्वारा माइनिंग नियमों की अनदेखी करते हुए नौगामा की लीज के नाम पर ईटीपी और भटूरा स्थित खदान से खनिज की लोडिंग का कथित खेल चल रहा है। आरोप लगाने वाले पक्ष ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए मौके पर जांच की मांग की है। साथ ही बरसात के दौरान खदान से खनिज निकाले जाने की स्थिति, सीमेंट उद्योगों को खनिज की आपूर्ति और कथित ओवरलोड वाहनों की जांच कर राजस्व नुकसान की वास्तविकता सामने लाने की मांग की गई है।
विस्तार
मैहर जिले के भटूरा क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आरोप लगाने वाले पक्ष ने त्रिदेव बढ़गईया, के.के. गौतम और पप्पू बाजपेई का नाम लेते हुए दावा किया है कि क्षेत्र में खनन नियमों की कथित अनदेखी कर खनिज परिवहन और लोडिंग का काम किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।
आरोप है कि लीज नौगामा में और ईटीपी भी नौगामा की, जबकि लोडिंग भटूरा स्थित पप्पू बाजपेई की खदान से किए जाने का मामला सामने आ रहा है। इसी दावे को लेकर सवाल उठाया गया है कि यदि खनिज की लीज और ईटीपी किसी दूसरे स्थान की है तो वास्तविक खनन और लोडिंग किस स्थान से हो रही है तथा इसके लिए विभागीय अनुमति क्या है।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच करनी चाहिए। खासतौर पर यह देखा जाना चाहिए कि जिस स्थान पर लीज स्वीकृत है, वहां बरसात के मौसम में खनन संभव है या नहीं। यदि वहां खनन की स्थिति नहीं है तो सीमेंट उद्योगों तक पहुंच रहा खनिज आखिर किस स्रोत से निकाला जा रहा है, इसकी जांच जरूरी है।
मामले में कथित रूप से राजस्व चोरी की आशंका भी जताई गई है। आरोप लगाने वाले पक्ष ने मांग की है कि खनिज के वास्तविक स्रोत, लीज क्षेत्र, ईटीपी, परिवहन दस्तावेज और सीमेंट उद्योगों को की गई आपूर्ति का मिलान कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि खनिज का परिवहन नियमानुसार हुआ या किसी तरह की अनियमितता की गई।
वहीं, पप्पू बाजपेई की खदान में कथित तौर पर करीब 45 टन खनिज लेकर ओवरलोड वाहन खड़े होने का दावा भी किया गया है। इसको लेकर भी जांच की मांग उठाई गई है। यदि वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चल रहे हैं तो परिवहन नियमों के तहत कार्रवाई की जरूरत होगी। हालांकि, ओवरलोडिंग संबंधी दावे की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और वाहन के वैध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
आरोप लगाने वाले पक्ष ने खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि यदि कथित गतिविधियां लगातार लंबे समय से चल रही हैं तो विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी और निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। साथ ही विभाग से मांग की गई है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर निरीक्षण किया जाए और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए लीज दस्तावेज, ईटीपी, खनिज परिवहन रिकॉर्ड, वाहन भार क्षमता और मौके की स्थिति की विभागीय जांच महत्वपूर्ण होगी। संबंधित खनिज अधिकारियों और आरोपों में नामित व्यक्तियों का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
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