
सार
देवेश शर्मा|मैहर। नगरपालिका के कायाकल्प योजना के तहत कराए गए सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कायाकल्प योजना के प्रथम फेज में बनाई गई कई सड़कें पहली ही बारिश में खराब हो गईं। नगरपालिका अध्यक्ष के कार्यकाल में ठेकेदार को कथित रूप से गुणवत्ता विहीन कार्यों का भुगतान किए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। अब रीवा से विशेष टीम द्वारा कायाकल्प योजना के कार्यों की जांच किए जाने की बात कही गई है। आरोप लगाने वाले पक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आर्थिक अपराध ब्यूरो से कराने की मांग उठाने की बात कही है।
विस्तार
धार्मिक नगरी मैहर को विकास और सौंदर्यीकरण के जरिए ऐसा स्वरूप देने की जरूरत है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को शहर की गलियों और प्रमुख मार्गों से गुजरते समय अलग अनुभव मिल सके। इसी उद्देश्य से नगरपालिका क्षेत्र में कायाकल्प योजना के तहत सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्य कराए गए। हालांकि, अब इन कार्यों की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि कायाकल्प योजना के प्रथम फेज में बनाई गई कई सड़कें एक बारिश भी नहीं झेल पाईं और जगह-जगह खराब होने लगीं। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की गई। स्थानीय लोगों द्वारा काम की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें किए जाने के बावजूद उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया और ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि नगरपालिका अध्यक्ष की जिम्मेदारी केवल पद संभालने तक सीमित नहीं होती, बल्कि विकास कार्यों की निगरानी, निर्माण की गुणवत्ता की जांच और जनता के हित में सही कार्य सुनिश्चित करना भी उनकी जवाबदेही है। इसी को लेकर सवाल उठाया गया है कि यदि सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी थी तो उसकी निगरानी और भुगतान की प्रक्रिया में जिम्मेदारी किसकी थी।
मामले को लेकर यह आरोप भी लगाया गया है कि नगरपालिका अध्यक्ष के संरक्षण में ठेकेदार द्वारा कथित तौर पर व्यापक अनियमितताएं की गईं। आरोप लगाने वाले पक्ष ने व्यंग्यात्मक रूप से इसे “दिया तले अंधेरा” बताते हुए कहा है कि कथित गुणवत्ता विहीन कार्य नगरपालिका अध्यक्ष की मंगलकुटी से महज करीब 200 मीटर की दूरी पर हुआ।
बताया गया है कि कायाकल्प योजना के कार्यों की जांच के लिए रीवा से विशेष टीम मैहर पहुंचने वाली है। जांच के दौरान सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, निर्माण की गुणवत्ता, निर्धारित मापदंडों के पालन और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच किए जाने की उम्मीद है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्यों में वास्तव में कोई अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी हुई है या नहीं।
आरोप लगाने वाले पक्ष ने नगरपालिका अध्यक्ष के कार्यकाल में कराए गए अन्य विकास कार्यों की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। साथ ही कथित भ्रष्टाचार की जांच आर्थिक अपराध ब्यूरो (EOW) से कराने और कार्यों में हुई संभावित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग किए जाने की बात कही गई है।
फिलहाल इन आरोपों पर नगरपालिका अध्यक्ष या संबंधित ठेकेदार का पक्ष सामने नहीं आया है। विशेष टीम की जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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