
मध्य प्रदेश की राजनीति में जब डॉ. मोहन यादव ने कमान संभाली थी, तब कई सवाल थे। लेकिन पिछले दो वर्षों के कार्यकाल ने उन तमाम कशमकश पर विराम लगा दिया है। ‘मृदुभाषी स्वभाव और कठोर निर्णय‘—यही डॉ. यादव की कार्यशैली की नई पहचान बनकर उभरी है। प्रदेश में सुशासन की एक ऐसी पटकथा लिखी गई है, जिसमें विकास की रफ्तार भी है और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की गूंज भी।
आइए जानते हैं उन बड़े फैसलों के बारे में, जिन्होंने मध्य प्रदेश को देश के मानचित्र पर एक ‘रोल मॉडल‘ के रूप में खड़ा कर दिया है।
1. पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा: अब आसमान से जुड़ा प्रदेश का कोना–कोना
मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने ‘पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा‘ के जरिए आम आदमी के हवाई सफर के सपने को हकीकत में बदला। डॉ. यादव के विजन से आज इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहर हवाई टैक्सी सेवा से जुड़ चुके हैं। इससे न केवल पर्यटन को पंख लगे हैं, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में भी यह सेवा मील का पत्थर साबित हो रही है।
2. लाड़ली बहनों को ‘रक्षा‘ का अटूट भरोसा
विपक्ष के तमाम कयासों को धता बताते हुए मुख्यमंत्री ने ‘लाड़ली बहना योजना‘ को न केवल जारी रखा, बल्कि इसे और अधिक सशक्त बनाया। हर महीने की निश्चित तारीख को करोड़ों महिलाओं के खाते में राशि का अंतरण डॉ. यादव की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आर्थिक सशक्तिकरण के साथ–साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹450 में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना उनके ‘अंत्योदय‘ संकल्प की जीत है।
3. ‘श्री कृष्ण पाथेय‘ और सांस्कृतिक पुनरुत्थान
डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश की धरती पर भगवान श्री कृष्ण के चरणों के निशान खोजने और उन स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने का जो बीड़ा उठाया है, उसने करोड़ों लोगों की आस्था को नई ऊर्जा दी है। उज्जैन के महाकाल लोक के बाद अब प्रदेश के अन्य धार्मिक कॉरिडोर का विकास उनकी ‘विरासत भी, विकास भी‘ की नीति का जीवंत प्रमाण है।
4. शिक्षा और रोजगार: युवाओं के लिए खुलते नए द्वार
नई शिक्षा नीति (NEP) को जमीन पर उतारने में मध्य प्रदेश अग्रणी रहा है। मुख्यमंत्री ने हर जिले में ‘एक्सीलेंस कॉलेज‘ की स्थापना कर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बदला है। साथ ही, औद्योगिक सम्मेलनों (Regional Industry Conclaves) के माध्यम से उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में निवेश लाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों अवसर पैदा किए हैं।
5. कानून व्यवस्था: अपराधियों में खौफ, जनता में विश्वास
सत्ता संभालते ही खुले में मांस–मछली की बिक्री पर रोक और धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने जैसे साहसी फैसलों ने डॉ. यादव की ‘सख्त प्रशासक‘ की छवि पेश की। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर पुलिस को खुली छूट और साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए कदमों ने प्रदेश की जनता को सुरक्षा का अहसास कराया है।
डॉ. मोहन यादव के दो साल का यह सफर केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे नेतृत्व की कहानी है जो जमीन से जुड़ा है। उन्होंने साबित किया है कि बिना शोर मचाए भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। मध्य प्रदेश अब केवल बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर ही नहीं आया है, बल्कि वह ‘विकसित भारत‘ के संकल्प को पूरा करने में सारथी की भूमिका निभा रहा है।







