
मुरैना/ महेंद्र सिंह लहरिया: माता बसैया थाना क्षेत्र के जिगनी गांव में स्मार्ट DTR मीटर लगाने के दौरान करंट लगने से 26 वर्षीय बिजली कर्मचारी शाहिद हुसैन की मौत के बाद हादसे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना ने बिजली से जुड़े कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों, विद्युत आपूर्ति बंद कराने की प्रक्रिया और आवश्यक परमिट को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
स्मार्ट DTR मीटर लगाने के दौरान करंट लगने से मौत
जानकारी के अनुसार, जिगनी गांव में स्मार्ट DTR मीटर लगाने का कार्य चल रहा था। इसी दौरान कर्मचारी शाहिद हुसैन करंट की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं पुलिस और संबंधित विभाग द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
कंपनी और विभाग की जिम्मेदारी को लेकर सवाल
बताया जा रहा है कि स्मार्ट मीटर परियोजना का काम Esyasoft कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा है। कथित तौर पर विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कंपनी के कर्मचारियों की नियुक्ति, प्रबंधन, निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और कार्य संचालन की जिम्मेदारी कंपनी की है। विभाग का यह भी कहना है कि कंपनी के कर्मचारी सीधे विभाग के अधीन नहीं आते।
हालांकि, इस संबंध में विभाग का आधिकारिक लिखित पक्ष अभी लिया जाना बाकी है।
क्या बिजली बंद कराकर लिया गया था Permit to Work?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या संबंधित स्थल पर काम शुरू करने से पहले विद्युत आपूर्ति बंद कराई गई थी? क्या कार्य के लिए निर्धारित Permit to Work लिया गया था? यदि काम चालू विद्युत लाइन के आसपास या लाइव लाइन पर कराया जा रहा था, तो क्या सभी सुरक्षा प्रक्रियाओं और निर्धारित मानकों का पालन किया गया?
इन सभी बिंदुओं की जांच हादसे की वास्तविक वजह सामने लाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
परिजनों और कर्मचारियों ने सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, परिजनों और कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कार्य के दौरान आवश्यक सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि कई बार कर्मचारियों से पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए बिना जोखिमपूर्ण बिजली कार्य कराए जाते हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
लापरवाही साबित हुई तो जिम्मेदारी तय करने की मांग
परिजनों का कहना है कि एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है और किसी भी कार्रवाई से उनका खोया हुआ व्यक्ति वापस नहीं आ सकता। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, वेंडर, कंपनी या अन्य संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
परिजनों का कहना है कि भविष्य में किसी अन्य कर्मचारी की जान न जाए, इसके लिए बिजली से जुड़े कार्यों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाना जरूरी है।
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जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी हादसे की वास्तविक वजह
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि हादसे के समय काम किन परिस्थितियों में कराया जा रहा था, क्या बिजली आपूर्ति बंद थी, क्या आवश्यक परमिट लिया गया था और क्या कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों, कंपनी, वेंडर या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
नोट: इस समाचार में सुरक्षा व्यवस्था, परमिट, अधिकारियों और कंपनी की जिम्मेदारी से संबंधित बातें परिजनों, कर्मचारियों एवं विभाग के कथित मौखिक पक्ष पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित कंपनी और विभाग का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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