
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी शिक्षक रूप सिंह चादर के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी की FIR रद्द कर दी। मामला एक अखबार में प्रकाशित खबर के बाद शुरू हुआ था, जिसमें शिक्षक की जगह किसी अन्य व्यक्ति के पढ़ाने का आरोप लगाया गया था। विभागीय जांच में यह मुख्य आरोप साबित नहीं हुआ।
अखबार की खबर के बाद शुरू हुई जांच
मामला नवंबर 2024 का है। एक अखबार में 18 नवंबर को खबर प्रकाशित हुई थी कि सरकारी शिक्षक रूप सिंह चादर की जगह कोई दूसरा व्यक्ति स्कूल में पढ़ा रहा है। खबर के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण किया और छात्रों व स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए।
अधिकारियों की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि विक्रम सिंह लोधी शिक्षक की जगह पढ़ाने का काम कर रहे थे। इसके बाद 18 नवंबर 2024 को शिक्षक को निलंबित कर दिया गया और अगले दिन 19 नवंबर को उनके खिलाफ धोखाधड़ी की FIR दर्ज की गई।
विभागीय जांच में मुख्य आरोप साबित नहीं हुआ
मामले में विभागीय जांच भी शुरू की गई। जांच के दौरान शिक्षक की जगह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पढ़ाने के मुख्य आरोप की विशेष रूप से जांच की गई। विभागीय जांच रिपोर्ट में यह आरोप साबित नहीं माना गया और शिक्षक को इस मुख्य आरोप से मुक्त कर दिया गया।
हालांकि, बाद में 4 जून 2025 को शिक्षक की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके पीछे आपराधिक मामला लंबित होना प्रमुख आधारों में शामिल था। इसके बाद शिक्षक ने FIR रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
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हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की FIR?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 11 सितंबर को मामले पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि FIR में धोखाधड़ी के जरूरी तत्व सामने नहीं आते। कोर्ट के अनुसार, मामले में शिक्षक द्वारा किसी तरह का धोखा, गलत प्रस्तुतीकरण या किसी व्यक्ति को बेईमानी से संपत्ति देने के लिए प्रेरित करने जैसी बात दर्ज नहीं थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप अधिकतम सेवा संबंधी कदाचार का मामला हो सकता है, जिस पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन उपलब्ध सामग्री से धोखाधड़ी का आपराधिक अपराध बनना साबित नहीं होता। विभागीय जांच में मुख्य आरोप पहले ही साबित नहीं हुआ था।
अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट से शुरू हुआ यह मामला जांच, निलंबन और FIR तक पहुंचा। बाद में विभागीय जांच में शिक्षक की जगह किसी अन्य व्यक्ति के पढ़ाने का मुख्य आरोप साबित नहीं हुआ। इसी पृष्ठभूमि में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी की FIR रद्द करते हुए कहा कि आरोपों से इस अपराध के आवश्यक तत्व सामने नहीं आते।
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