
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक महकमे से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने उन अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है जो छुट्टियों के प्लान बना रहे थे। खबर है एक ऐसे ‘बड़े साहब’ की, जिनकी कार्यशैली ने दफ्तर का माहौल पूरी तरह बदल दिया है।
कहते हैं सरकारी नौकरी में छुट्टियों का अपना ही सुकून होता है, लेकिन एक बड़े विभाग के ‘साहब’ ने इस सुकून पर ‘मीटिंग’ का ब्रेक लगा दिया है। साहब हाल ही में कुछ दिनों के अवकाश के बाद लौटे हैं, और लौटते ही उन्होंने वही पुराना सख्त अंदाज अपना लिया है। लेकिन इस बार चर्चा उनके काम की नहीं, बल्कि उनकी टाइमिंग की हो रही है।
दरअसल, साहब अब केवल कार्यदिवसों में ही नहीं, बल्कि छुट्टियों के दिन भी दफ्तर पहुंचने के लिए सुर्खियों में हैं। हद तो तब हो गई जब उन्होंने आगामी छुट्टियों के लिए भी मीटिंगों का एजेंडा तय कर दिया है।
सूत्रों की मानें तो जिन अफसरों ने परिवार के साथ बाहर जाने या घर पर आराम करने की योजना बनाई थी, उन्हें अब मजबूरी में दफ्तर का रास्ता नापना पड़ रहा है। गलियारों में तो अब यह मजाक भी चल पड़ा है कि साहब शायद “छुट्टियों के काम का कोटा” भी इसी कार्यकाल में पूरा करना चाहते हैं। वरना छुट्टी के दिन प्रेजेंटेशन और फाइलों के बीच पसीना बहाने की क्या जरूरत?
हालांकि, साहब के सख्त मिजाज के सामने फिलहाल किसी की हिम्मत नहीं है कि कोई खुलकर विरोध दर्ज कराए। नतीजा यह है कि बेमन से ही सही, अधिकारी अपनी छुट्टियों की बलि देकर मीटिंग रूम में हाजिरी लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि साहब का यह ‘वर्क मोड’ कब तक जारी रहता है और कर्मचारियों का सब्र कब तक साथ देता है।
मध्य प्रदेश की तमाम प्रशासनिक और राजनीतिक खबरों के लिए जुड़े रहिए ब्रांडवाणी समाचार के साथ।







