
मध्य प्रदेश में वेतन कटौती से जुड़े मामले में करीब एक लाख कर्मचारियों को बड़ा झटका लग सकता है। राज्य सरकार इस मामले को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रही है।
दरअसल, इससे पहले हाईकोर्ट ने पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार के उस आदेश को अवैध ठहराया था, जिसमें कुछ कर्मचारियों के वेतन से कटौती से संबंधित निर्णय लिया गया था। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में नई कानूनी स्थिति पैदा हो गई है।
अब राज्य की मोहन यादव सरकार इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए शीर्ष अदालत का निर्णय आवश्यक है।
इस मामले का असर राज्य के लगभग एक लाख कर्मचारियों पर पड़ सकता है, क्योंकि अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही यह तय होगा कि वेतन कटौती से जुड़े आदेशों का भविष्य क्या होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही इस विवाद पर अंतिम निर्णय सामने आएगा। फिलहाल राज्य के कर्मचारी संगठनों और संबंधित विभागों की नजर इस पूरे मामले के अगले कदम पर टिकी हुई है।









