
भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ‘साहब’ की चर्चा जोरों पर है। चर्चा उनके काम की नहीं, बल्कि उनकी ‘अंतिम पारी’ की है। सचिवालय के लूप लाइन में लंबे समय से समय काट रहे अपर मुख्य सचिव (ACS) स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी अब मुख्यधारा में लौटने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो साहब के पास सेवा के अब करीब 12 महीने ही बचे हैं। ऐसे में उनकी दिली इच्छा है कि रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़ा उनका करियर एक बार फिर ‘मलाईदार’ विभाग की चमक देख सके। प्रशासनिक शब्दावली में कहें तो साहब अपनी अंतिम पारी में कुछ ऐसे ‘जोरदार शॉट’ लगाना चाहते हैं, जिसकी गूंज उनके रिटायरमेंट के बाद भी सुनाई दे।
सत्ता के गलियारों में यह खबर आम है कि पिछली तबादला सूची में साहब का नाम लगभग फाइनल हो चुका था। उन्हें एक बेहद रसूखदार और बड़े विभाग की कमान मिलने ही वाली थी, लेकिन ‘ऐन वक्त’ पर समीकरण बदल गए। अंतिम क्षणों में चली कैंची ने साहब का पत्ता काट दिया और वे एक बार फिर मुख्यधारा से बाहर रह गए।
साहब की उम्मीदों का दामन अभी छूटा नहीं है। उनके पास ‘पिछली सरकार’ के दौरान ‘मुखिया जी’ के साथ काम करने का लंबा अनुभव है। पुराने समीकरणों और संबंधों की इसी पूंजी के भरोसे वे एक बार फिर ‘अच्छी पोस्टिंग’ की आस लगाए बैठे हैं।
ब्रांडवानी समाचार के लिए ब्यूरो की रिपोर्ट।







