
सार
भगवान श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पटरानियों में से तीन का संबंध मध्य प्रदेश से बताया जाता है। धार का अमझेरा रुक्मिणी से, रायसेन के बरेली क्षेत्र का जामगढ़ जाम्बवती से और उज्जैन मित्रविंदा से जुड़ा माना जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर इन स्थानों से जुड़ी श्रीकृष्ण की कथाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन तीनों स्थानों पर श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग घटित हुए थे।
विस्तार
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन से जुड़ी है, लेकिन मध्य प्रदेश में भी उनके जीवन और परिवार से संबंधित कई धार्मिक स्थल और लोक कथाएं प्रचलित हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पटरानियों में शामिल रुक्मिणी, जाम्बवती और मित्रविंदा से जोड़ा जाता है। धार का अमझेरा, रायसेन का जामगढ़ और उज्जैन इन कथाओं से जुड़े प्रमुख स्थान बताए जाते हैं।
धार जिले का अमझेरा भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की कथा से जुड़ा माना जाता है। यहां स्थित अमका-झमका मंदिर इस प्रसंग की याद दिलाता है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी श्रीकृष्ण को पति के रूप में चाहती थीं। हालांकि उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। इसके बाद रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी इच्छा बताई। कथा के अनुसार, श्रीकृष्ण वहां पहुंचे और रुक्मिणी को अपने साथ ले गए। बाद में दोनों का विवाह हुआ। इसी वजह से अमझेरा को रुक्मिणी और श्रीकृष्ण की कथा से जोड़कर देखा जाता है।
उज्जैन का संबंध श्रीकृष्ण की प्रमुख पत्नी मित्रविंदा से बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मित्रविंदा अवंतिका यानी वर्तमान उज्जैन के राजा जयसेन की पुत्री थीं। उनके भाई विन्द और अनुविन्द थे। कथा के मुताबिक मित्रविंदा श्रीकृष्ण को अपना पति बनाना चाहती थीं, लेकिन उनके भाई उनका विवाह दुर्योधन से कराना चाहते थे। इसके लिए स्वयंवर आयोजित किया गया। जब श्रीकृष्ण को मित्रविंदा की इच्छा के बारे में पता चला तो वे उन्हें अपने साथ ले गए। इसके बाद विन्द और अनुविन्द से उनका युद्ध हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण ने उन्हें पराजित किया। बाद में मित्रविंदा से श्रीकृष्ण का विवाह हुआ।
रायसेन जिले के बरेली के पास स्थित जामगढ़ की गुफा को जामवंत और उनकी पुत्री जाम्बवती की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी क्षेत्र में जामवंत का निवास था और यहीं से श्रीकृष्ण और जाम्बवती के विवाह की कथा जुड़ी है।
जाम्बवती और श्रीकृष्ण के विवाह की कहानी स्यमंतक मणि से जुड़ी है। धार्मिक कथा के अनुसार, यह मणि द्वारका के सत्राजित के पास थी और इससे प्रतिदिन 20 तोला सोना प्राप्त होने की बात कही जाती थी। श्रीकृष्ण ने सत्राजित से मणि राजकोष में देने को कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया। बाद में सत्राजित का भाई प्रसेनजित मणि लेकर जंगल गया, जहां एक शेर ने उसे मार दिया। इसके बाद मणि जामवंत के पास पहुंच गई।
प्रसेनजित की मौत और मणि गायब होने के बाद सत्राजित ने श्रीकृष्ण पर मणि चोरी करने का आरोप लगा दिया। अपने ऊपर लगे आरोप को गलत साबित करने के लिए श्रीकृष्ण मणि की तलाश में निकले। कथा के अनुसार, उनकी खोज जामवंत तक पहुंची और दोनों के बीच युद्ध हुआ। युद्ध के दौरान जामवंत ने श्रीकृष्ण को पहचान लिया। इसके बाद उन्होंने स्यमंतक मणि श्रीकृष्ण को सौंप दी और अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह उनसे कर दिया। श्रीकृष्ण ने बाद में मणि सत्राजित को लौटा दी।
जन्माष्टमी के मौके पर मध्य प्रदेश के इन धार्मिक स्थलों का महत्व और बढ़ जाता है। रुक्मिणी, जाम्बवती और मित्रविंदा से जुड़ी ये कथाएं प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानी जाती हैं। हालांकि इन स्थानों से जुड़ी कई बातें धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित हैं।
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