
मुजफ्फरनगर: किसानों के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया खाद की कालाबाजारी करने वाले एक बड़े गिरोह का मुजफ्फरनगर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरोह से जुड़े 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और यमुनानगर के 3 दुकानदार तथा 5 सप्लायर शामिल हैं। पुलिस ने उनके कब्जे से 454 बोरी यूरिया भी बरामद की है।
किसानों की खाद फैक्ट्रियों तक पहुंचा रहा था गिरोह
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सरकार द्वारा किसानों के लिए सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाने वाली यूरिया को अवैध रूप से खरीदकर प्लाईवुड फैक्ट्रियों तक पहुंचा रहे थे। सरकारी स्तर पर लगभग 265 रुपये प्रति बोरी उपलब्ध होने वाली यूरिया को यह गिरोह 850 रुपये प्रति बोरी तक बेच रहा था। पुलिस के अनुसार प्लाईवुड उद्योग में यूरिया का उपयोग ग्लू (चिपकाने वाला पदार्थ) बनाने में किया जाता है। इसी मांग का फायदा उठाकर आरोपी बड़े पैमाने पर खाद की कालाबाजारी कर रहे थे।
छह महीने में 33 हजार बैग बेचने का दावा
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पिछले छह महीनों के दौरान गिरोह ने करीब 33 हजार यूरिया बैग विभिन्न फैक्ट्रियों को सप्लाई किए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यूरिया की इतनी बड़ी मात्रा आरोपियों तक कैसे पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
अधिकारियों और दुकानदारों की मिलीभगत की आशंका
जांच एजेंसियों को शक है कि इस अवैध कारोबार में कुछ निजी दुकानदारों के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी मिलीभगत हो सकती है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि सरकारी खाद किसानों तक पहुंचने के बजाय फैक्ट्रियों में कैसे पहुंच रही थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बुलंदशहर में भी कालाबाजारी के लिए ले जाई जा रही तीन ट्रक यूरिया पकड़ी गई थी। उस मामले में जांच के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी और कुछ को निलंबित भी किया गया था।
बड़े नेटवर्क की जांच शुरू
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सब्सिडी वाली यूरिया की ब्लैकमार्केटिंग एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कारोबारी, फैक्ट्री संचालक और संभावित संरक्षण देने वाले लोग कौन हैं। पुलिस ने बरामद यूरिया को कब्जे में लेकर आरोपियों के खिलाफ आवश्यक धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही पूरे सप्लाई चेन और आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है, ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े सभी लोगों को कानून के दायरे में लाया जा सके।
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