
सार
मैहर/ देवेश शर्मा: मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस के धरना प्रदर्शन और इसके बाद सामने आए माफीनामे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रमेश प्रजापति के सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को लेकर कहा कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि एक संगठन के अध्यक्ष को माफी मांगनी पड़ी। त्रिपाठी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी होना स्वाभाविक है और इसके लिए माफी मांगने को मजबूर करना उचित नहीं है।
विस्तार
मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने हाल ही में महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा किए गए धरना प्रदर्शन और उसके बाद सामने आए माफीनामे के घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या संगठन की ओर से जब किसी मुद्दे को लेकर धरना प्रदर्शन किया जाता है, तो वहां समर्थन में जिंदाबाद और विरोध में मुर्दाबाद के नारे लगना राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा है। उनके मुताबिक, जब कोई नेता या प्रशासनिक अधिकारी अच्छा काम करता है तो उसे जिंदाबाद कहा जाता है, वहीं काम अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं होने पर विरोध और मुर्दाबाद के नारे भी सुनने पड़ते हैं।
‘जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ता है’
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अपने काम के लिए जनता की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ता है। उन्होंने महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी संगठन की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया था।
उन्होंने कहा कि यदि किसी कारण से एसडीएम ज्ञापन लेने के लिए उपलब्ध नहीं हो पाए तो इसके पीछे व्यस्तता या कोई प्रशासनिक मजबूरी हो सकती है। लेकिन ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों का आक्रोश सामने आना भी स्वाभाविक है।
त्रिपाठी के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और अलग-अलग राजनीतिक दल अपने मुद्दों को लेकर सरकार तथा प्रशासन के सामने अपनी बात रखते हैं।
‘रमेश प्रजापति को माफी मांगने के लिए मजबूर करना सवाल खड़ा करता है’
पूर्व विधायक ने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रमेश प्रजापति के माफी मांगने को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि रमेश प्रजापति एक राजनीतिक संगठन के अध्यक्ष होने के साथ-साथ अनुसूचित जाति वर्ग से भी आते हैं।
त्रिपाठी ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने कहा कि किसी संगठन के अध्यक्ष को इस तरह माफी मांगने के लिए मजबूर किए जाने की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उनका तर्क था कि यदि रमेश प्रजापति के नेतृत्व में कांग्रेस के बैनर तले प्रदर्शन हुआ था, तो उनके द्वारा मांगी गई सार्वजनिक माफी को केवल व्यक्तिगत माफी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
‘या मुद्दा गलत था या माफी के लिए मजबूर करना’
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान उठाया गया मुद्दा गलत था तो संगठन को यह स्पष्ट करना चाहिए था। वहीं यदि मुद्दा सही था और प्रदर्शन लोकतांत्रिक तरीके से किया गया था, तो माफी मांगने के लिए दबाव बनाया जाना भी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में दो सवाल सामने आते हैं- या तो प्रदर्शन के दौरान उठाया गया मुद्दा गलत था या फिर किसी व्यक्ति को माफी मांगने के लिए मजबूर करना गलत था।
‘लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए ठीक नहीं’
पूर्व विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में विरोध और असहमति के लिए जगह होनी चाहिए।
त्रिपाठी ने कहा कि देश की राजनीति जिस दिशा में बदल रही है, उसमें यदि धरना प्रदर्शन करने के बाद माफी मांगने की स्थिति पैदा होने लगे तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने इसे गलत और निंदनीय बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
फिलहाल नारायण त्रिपाठी के इस बयान के बाद मैहर की स्थानीय राजनीति में इस मुद्दे को लेकर सियासी चर्चा और तेज होने के आसार हैं।
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