
एक बड़े विभाग में कमिश्नर के तौर पर पदस्थ प्रमोटी आईएएस इन दिनों विपक्षी नेताओं के निशाने पर हैं। मामला विभाग द्वारा कंप्यूटर खरीद के लिए जारी की गई करीब 80 करोड़ रुपये की निविदा से जुड़ा बताया जा रहा है। निविदा की शर्तों को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि शर्तें इस तरह तैयार की गई हैं, जिससे दो कथित चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके।
विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में कंपनियों के साथ-साथ साहब के कथित हितों का भी ध्यान रखा गया। खास बात यह है कि विभाग के अंदर से ही किसी व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर निविदा से जुड़े दस्तावेज विपक्षी नेताओं तक पहुंचाए जाने की बात सामने आ रही है। दस्तावेज हाथ लगने के बाद विपक्षी नेताओं ने इस मामले को लेकर साहब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
फिलहाल मामला गरम है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। हालांकि, कमिश्नर साहब की ओर से पूरे प्रकरण पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। करीब 80 करोड़ रुपये की कंप्यूटर खरीद से जुड़ी इस निविदा की शर्तों और कथित दस्तावेजों को लेकर विपक्षी नेताओं की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। अब इस मामले में आगे क्या स्थिति बनती है, इस पर नजर बनी हुई है।
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