
सार
दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG भवन गिरने की घटना को दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए MCD की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि हादसे की जिम्मेदारी केवल PG भवन के मालिक तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका की भी जांच जरूरी है। कोर्ट ने अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन के प्रयास दोगुने करने के निर्देश दिए और दिल्ली में PG व हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक ऑडिट कराने पर जोर दिया।
विस्तार
दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला PG भवन के ढहने की घटना पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया है। हादसे के समय भवन में मरम्मत का काम चल रहा था।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अधिकारियों को रेस्क्यू ऑपरेशन के प्रयास दोगुने करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि मलबे में यदि कोई व्यक्ति फंसा है तो उसकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और MCD की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि बचाव अभियान पूरी तेजी से चलाया जा रहा है और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट ने MCD को मामले की जांच उच्चतम कार्यकारी स्तर पर कराने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाने को कहा गया है कि जिस भवन में PG संचालित हो रहा था, उसका निर्माण वैध अनुमति और निर्धारित बिल्डिंग बायलॉज के तहत हुआ था या नहीं। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानकारी भी देने को कहा गया है।
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कोर्ट ने केवल भवन मालिक की भूमिका तक मामले को सीमित रखने पर भी सवाल उठाया। पीठ ने कहा कि दिल्ली में देशभर से छात्र उच्च शिक्षा के लिए आते हैं और पर्याप्त हॉस्टल सुविधा नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG में रहने को मजबूर होते हैं। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केवल PG संचालकों की नहीं है, बल्कि संबंधित सरकारी और विश्वविद्यालय स्तर के अधिकारियों की भी है।
हाईकोर्ट ने MCD को दिल्ली के PG और छात्रावासों का व्यापक निरीक्षण कराने का निर्देश भी दिया है। एक सप्ताह के भीतर यह जांच करने को कहा गया है कि PG आवश्यक अनुमति और बिल्डिंग नियमों के अनुसार संचालित हो रहे हैं या नहीं। साथ ही प्रत्येक PG में रहने वाले छात्रों की संख्या से जुड़ी जानकारी भी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने दिल्ली में PG व्यवस्था को लेकर नियमन की स्थिति पर भी जवाब मांगा है। MCD से पूछा गया है कि क्या दिल्ली में PG हॉस्टल को नियंत्रित करने के लिए कोई वैधानिक नियम या कार्यकारी व्यवस्था मौजूद है। यदि ऐसी व्यवस्था नहीं है तो उसे तैयार करने की आवश्यकता पर भी कोर्ट ने जोर दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय से भी बाहर से आने वाले छात्रों की संख्या और विश्वविद्यालय या सरकार द्वारा संचालित हॉस्टलों की उपलब्धता की जानकारी मांगी गई है।
इस मामले में दायर जनहित याचिका में हादसे की स्वतंत्र और व्यापक जांच, पीड़ितों के लिए चिकित्सा सहायता एवं पुनर्वास, मुआवजा और असुरक्षित परिसरों में रह रहे छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की मांग की गई है। याचिका में हादसे की वास्तविक वजह और भवन की संरचनात्मक स्थिति की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक या तकनीकी समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
हादसे के बाद MCD ने दक्षिण क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार समेत पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। वहीं, पुलिस ने भवन मालिक को राजस्थान के भिवाड़ी से हिरासत में लिया है। बचाव अभियान में दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें जुटी हुई हैं।
कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर के अंत में होगी। फिलहाल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जांच का दायरा भवन मालिक से आगे बढ़कर निर्माण अनुमति, सरकारी निगरानी, PG व्यवस्था और छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की पूरी व्यवस्था तक पहुंच गया है।
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