
सीहोर/ नफीस ख़ान: सीहोर जिले के भेरूंदा थाना क्षेत्र के बगलीखेड़ा गांव में अवैध शराब की बिक्री का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव में कई जगह खुलेआम शराब बेची जा रही है। एक स्थान पर स्कूल ड्रेस पहने नाबालिग से शराब बेचने का दावा किया गया, जबकि एक महिला द्वारा बीयर निर्धारित कीमत से अधिक में बेचने की बात भी सामने आई। ग्रामीणों के बीच कच्ची शराब उपलब्ध होने की चर्चा ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अवैध शराब बिक्री की स्थिति
सीहोर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। भेरूंदा थाना क्षेत्र के बगलीखेड़ा गांव में अवैध शराब बिक्री की स्थिति सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गांवों में शराब का यह कारोबार किसकी निगरानी में चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतों के बाद जब टीम बगलीखेड़ा गांव पहुंची तो कई स्थानों पर शराब की बिक्री होने की बात सामने आई। टीम के अनुसार, कुछ दुकानों और घरों पर शराब उपलब्ध कराई जा रही थी। सबसे गंभीर स्थिति उस समय नजर आई, जब कथित तौर पर एक दुकान पर स्कूल ड्रेस पहना नाबालिग शराब बेचता मिला।
नाबालिग को शराब बिक्री में इस्तेमाल किए जाने को लेकर गंभीर सवाल
टीम ने जब बच्चे से शराब की कीमत पूछी तो उसने कथित तौर पर 120 रुपये मांगे। वहीं, संबंधित शराब की सरकारी कीमत करीब 85 रुपये बताई गई। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल अवैध बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नाबालिग को शराब बिक्री में इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।
इसके बाद टीम गांव में आगे बढ़ी तो एक अन्य दुकान पर बीयर की बिक्री का मामला सामने आया। यहां एक महिला द्वारा लेमाउंट बीयर करीब 200 रुपये में बेचने की बात सामने आई, जबकि इसकी सरकारी कीमत लगभग 170 रुपये बताई गई। निर्धारित कीमत से अधिक पर शराब की बिक्री का आरोप भी आबकारी व्यवस्था और स्थानीय निगरानी पर सवाल खड़ा करता है।
गांव में कच्ची शराब को लेकर भी चर्चा
मामला यहीं नहीं रुका। गांव के भीतर आगे जाने पर जब कच्ची शराब के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो कुछ लोगों ने कथित तौर पर बताया कि उस दिन कच्ची शराब उपलब्ध नहीं है और अगले दिन मिल सकती है। लोगों द्वारा ‘कल आना’ जैसी बात कहे जाने से गांव में कच्ची शराब की उपलब्धता को लेकर भी संदेह और चर्चा बढ़ गई।
ग्रामीण इलाकों में कच्ची शराब का कारोबार बेहद गंभीर विषय है। खासकर तब, जब अवैध तरीके से तैयार की गई शराब जहरीली साबित होकर लोगों की जान तक ले सकती है। ऐसे मामलों में प्रशासन और आबकारी विभाग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि शराब की अवैध बिक्री, भंडारण और निर्माण पर समय रहते कार्रवाई की जाए।
शिवराज के निर्देशों के बावजूद सवाल
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब और नशे के कारोबार पर अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद बगलीखेड़ा में सामने आए हालात प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करते हैं।
सवाल यह है कि यदि गांव में खुलेआम शराब बिक्री हो रही है और लोगों को शराब उपलब्ध होने की जानकारी है तो संबंधित विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या क्षेत्र में नियमित जांच और निगरानी नहीं की जा रही है? यदि शिकायतें पहले से मिल रही थीं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गुना की घटना से सबक कब?
मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में जहरीली कच्ची शराब से जुड़े मामलों में पहले भी गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गुना जिले में जहरीली कच्ची शराब पीने से लोगों की मौत का मामला सामने आने के बाद अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
ऐसे में सीहोर के बगलीखेड़ा गांव में कच्ची शराब की कथित उपलब्धता की जानकारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। प्रशासन को यह पता लगाने की जरूरत है कि गांव में शराब कहां से पहुंच रही है, कौन इसकी बिक्री कर रहा है और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर से अवैध शराब तथा नशे के कारोबार के खिलाफ लगातार सख्ती के निर्देश दिए जा रहे हैं, तो जमीनी स्तर पर हालात अलग क्यों नजर आ रहे हैं। क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है या फिर अवैध शराब के इस कारोबार पर जल्द कोई ठोस कार्रवाई होगी?
बगलीखेड़ा में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। खासतौर पर नाबालिग से शराब बिक्री, शराब को निर्धारित कीमत से अधिक पर बेचने और कच्ची शराब की कथित उपलब्धता जैसे आरोपों पर संबंधित विभाग की कार्रवाई का इंतजार रहेगा।
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