
बड़े जिले की कमान संभाल रहे एक सीधे भर्ती के आईपीएस साहब इन दिनों अपने ऑफिस के बाहर लगे एक बोर्ड को लेकर चर्चा में हैं। ऑफिस के बाहर लगाए गए बोर्ड पर साफ-साफ लिखवाया गया है—“अनाधिकृत प्रवेश वर्जित है।” अब सवाल यह है कि साहब के हिसाब से अधिकृत कौन है और अनाधिकृत कौन? बोर्ड पर इसका कोई अलग से विवरण दिखाई नहीं देता। इसी वजह से ऑफिस में आने-जाने वालों के बीच यह बोर्ड चर्चा का विषय बना हुआ है।
दिलचस्प बात यह भी है कि इस फरमान की जरूरत क्यों महसूस हुई, इसकी वजह भी साफ नहीं है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि ऑफिस के दरवाजे पर ही प्रवेश की सीमा तय करने की जरूरत पड़ गई? प्रशासनिक महकमे में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। साहब का जिला हाल ही में बाढ़ की मार झेल चुका है। उस दौरान पड़ोसी राज्य के एक जिले के एसपी के अपने जिले में पहुंचकर राहत और रेस्क्यू में मदद करने की खबरों ने भी खूब ध्यान खींचा था।
अब इसी बीच अपने ऑफिस के बाहर “अनाधिकृत प्रवेश वर्जित” का बोर्ड लगवाने को लेकर एसपी साहब चर्चा में हैं। सवाल यही है कि इस व्यवस्था के तहत किन लोगों को अधिकृत प्रवेश मिलेगा और किन लोगों को रोका जाएगा। बोर्ड पर केवल प्रवेश को लेकर रोक की बात लिखी गई है, लेकिन इसके पीछे की वजह स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में पुलिस कार्यालय की कार्यप्रणाली और इस आदेश की आवश्यकता को लेकर महकमे में चर्चाओं का दौर जारी है।
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