
सार
उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश करने, फोटो-वीडियोग्राफी करने और स्कूलों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों राज्यों में सरकारी स्कूलों में अनधिकृत तरीके से प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर लगी पाबंदियां फिलहाल जारी रहेंगी। सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर चल रहे ‘School Theek Karo’ अभियान के बीच उत्तर प्रदेश और राजस्थान में स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश, फोटो खींचने और वीडियो बनाने को लेकर प्रशासन की ओर से प्रतिबंध लगाए गए थे। इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में इन पाबंदियों को नागरिकों और मीडिया की निगरानी तथा सूचना के अधिकार से जुड़े सवालों के संदर्भ में चुनौती दी गई थी।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसका मतलब यह है कि संबंधित राज्य सरकारों की ओर से सरकारी स्कूलों में प्रवेश और रिकॉर्डिंग को लेकर बनाए गए मौजूदा नियम फिलहाल प्रभावी रहेंगे।
मामला ऐसे समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जब सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर CJP के ‘School Theek Karo’ अभियान की चर्चा तेज है। अभियान के दौरान स्कूलों की इमारतों, कक्षाओं, शौचालयों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सार्वजनिक रूप से सामने लाने की कोशिश की गई है।
सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों द्वारा वीडियो बनाने और तस्वीरें लेने को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा, बच्चों की निजता और स्कूलों के सामान्य संचालन जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। दूसरी ओर, स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने वाले अभियानों का तर्क है कि सरकारी संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जनता के सामने आनी चाहिए।
इसी टकराव के बीच उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लगाए गए प्रतिबंधों को अदालत में चुनौती दी गई। याचिका में इन प्रतिबंधों की वैधता पर सवाल उठाए गए थे।
यह मामला Cockroach Janta Party से जुड़े ‘School Theek Karo’ अभियान की पृष्ठभूमि में सामने आया है। संगठन की ओर से सरकारी स्कूलों की खराब व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया जा रहा है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान जारी रखने की बात कही है। उनका कहना है कि शिकायतों और मामलों के बावजूद स्कूलों की समस्याओं को सामने लाने का अभियान जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटो और वीडियोग्राफी से जुड़े प्रतिबंधों में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। अब इस मुद्दे पर आगे की कानूनी कार्रवाई और राज्य सरकारों के नियमों के अनुसार स्थिति तय होगी।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता और बच्चों की निजता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत के सामने चुनौती यही है कि एक तरफ स्कूलों की वास्तविक स्थिति की निगरानी और सार्वजनिक जवाबदेही बनी रहे, वहीं दूसरी तरफ विद्यार्थियों और स्कूल प्रशासन के अधिकारों की भी रक्षा हो।
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