
सागर (मप्र)/ मनीष चौबे : मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 25 मार्च को प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का दौरा करेंगे, वे इस दौरान वे चीतों के पुनर्वास के लिए ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ का भूमिपूजन करेंगे. यह कदम इस रिजर्व को न केवल बाघों बल्कि चीतों के लिए भी एक सुरक्षित ठिकाना बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. मुख्यमंत्री अपने प्रवास के दौरान बामनेर नदी में एक दर्जन कछुओं को भी मुक्त करेंगे, जो पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण का संदेश देगा।
1974 का अभयारण्य अब प्रदेश का सबसे बड़ा ‘टाइगर किंगडम’
यह वन्यजीव संरक्षण टाइगर रिजर्व 1974 में एक साधारण अभयारण्य के रूप में शुरू हुआ यह क्षेत्र आज 2300 वर्ग किलोमीटर में फैला मध्य प्रदेश का सबसे विशाल टाइगर रिजर्व बन चुका है. 2023 में सागर के नौरादेही अभयारण्य और दमोह के रानी दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर इसका गठन किया गया. इसमें सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों के 72 गांवों को शामिल किया गया है.
एक टाइगर से शुरू हुआ सफर, अब 32 बाघों की दहाड़
2018 में कान्हा से ‘राधा’ (N1) और बांधवगढ़ से ‘किशन’ (N2) बाघों को यहाँ लाया गया, इसके साथ ही कुनबा बढ़ाऔर राधा-किशन की जोड़ी ने तीन शावकों को जन्म दिया वर्तमान स्थिति: आज यहाँ बाघों की संख्या बढ़कर लगभग 32 हो गई है.
‘मिनी सवाना’ जैसा अहसास: चीतों के लिए अनुकूल माहौल
विशेषज्ञों के अनुसार, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की भौगोलिक स्थिति दक्षिण अफ्रीका के घास के मैदानों यानी ‘सवाना’ जैसी है। यही कारण है कि इसे चीतों के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ के तहत एक बड़ा घेरा बनाया जाता है, जहाँ बाहरी वातावरण से आने वाले जानवरों को अनुकूलन के लिए रखा जाता है।
जैव विविधता का खजाना और पर्यटन की संभावनाएं
यह वन्यजीव में पैंथर, भालू, लकड़बग्घा, नीलगाय, चौसिंगा, काला हिरण और चिंकारा जैसे वन्यजीव मौजूद हैं, साथ ही यहाँ पक्षियों की 240 प्रजातियां और 4 प्रकार के गिद्ध पाए जाते हैं. रोजगार के अवसर से यह टाइगर रिजर्व बनने से बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे. साथ ही विस्थापन और विकास का तालमेल भी जुड़ा है, यह टाइगर रिजर्व विस्तार के लिए 72 गांवों में से 36 गांवों का विस्थापन सफलतापूर्वक किया जा चुका है ,और उन्हें उचित मुआवजा दिया गया है. शेष 36 गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है.
मध्य प्रदेश का यह नया टाइगर रिजर्व न केवल वन्यजीव संरक्षण में एक मील का पत्थर साबित होगा बल्कि क्षेत्रीय विकास और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
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