
भोपाल | विशेष संवाददाता मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MPCST) आज राज्य में नवाचार और अनुसंधान का नया केंद्र बनकर उभरी है। कभी उपेक्षा का शिकार होकर हाशिए पर जा चुके इस विभाग ने पिछले कुछ समय में जो रफ्तार पकड़ी है, उसने न केवल प्रशासनिक गलियारों बल्कि देशभर के वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस बदलाव की पटकथा लिखी है विभाग के महानिदेशक प्रो. अनिल कोठारी की अथक मेहनत और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व ने।
विस्मृति के दौर से ‘विज्ञान के स्वर्ण युग‘ तक
एक समय ऐसा था जब MPCST की गतिविधियां केवल फाइलों तक सीमित रह गई थीं। विभाग की पहचान धीरे-धीरे लुप्त होने लगी थी, लेकिन प्रो. अनिल कोठारी ने कमान संभालते ही संस्थान के बुनियादी ढांचे और कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन किए। उनके विजन ने मृतप्राय हो चुके इस विभाग में नई जान फूँक दी है। आज परिषद में आए दिन अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के शोध कार्यक्रम, सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जो सीधे तौर पर प्रदेश के युवाओं और शोधकर्ताओं को लाभान्वित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में ‘विज्ञान और शोध‘
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जो स्वयं इस विभाग के चेयरमैन हैं, की सक्रियता ने परिषद को नई शक्ति प्रदान की है। मुख्यमंत्री का मानना है कि ‘विकसित मध्य प्रदेश‘ का सपना विज्ञान और तकनीक के बिना अधूरा है। उनके मार्गदर्शक के रूप में जुड़ने से विभाग को मिलने वाले बजटीय और प्रशासनिक अवरोध दूर हुए हैं। मुख्यमंत्री के सहयोग और प्रो. कोठारी के क्रियान्वयन के तालमेल ने परिषद को एक ऐसी नई दिशा दी है, जहाँ अब केवल कागजी शोध नहीं, बल्कि ‘ग्राउंड लेवल रिसर्च‘ पर जोर दिया जा रहा है।
भविष्य की राह: तकनीक से सजेगा कल
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रो. कोठारी का तकनीकी कौशल और डॉ. मोहन यादव की विकासवादी सोच का यह संगम भविष्य में परिषद को देश के शीर्ष 5 वैज्ञानिक संस्थानों में लाकर खड़ा कर देगा। आने वाले समय में यहाँ से होने वाले रिसर्च न केवल कृषि, उद्योग बल्कि आम जनजीवन की समस्याओं के समाधान में भी मील का पत्थर साबित होंगे।
“हमारा लक्ष्य विज्ञान को प्रयोगशालाओं से निकालकर आम जन के विकास से जोड़ना है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हम मध्य प्रदेश को देश का साइंस हब बनाने की ओर अग्रसर हैं।” — प्रो. अनिल कोठारी, (महानिदेशक, MPCST)








