
ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हमला पूरी तरह से जारी है. ईरान के परमाणु प्लांट, सैन्य ठिकाने और तेल फैक्ट्रियों को निशा बनाकर हमले किए जा रहे हैं. ईरान भी इन हमलों का जवाब अपने तरीके से दे रहा है. इन हमलों के बीच ईरान का एक छोटा सा द्वीप पूरी तरह से सुरक्षित है. इसकी वजह बेहद खास है. इस द्वीप का नाम है खार्ग आइलैंड है. यह ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है. अगर अमेरिका या इजरायल ने इस द्वीप पर हमला किया तो ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी. दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी. कई विशेषज्ञों का मानना है कि ये हमला इतना बड़ा झटका होगा कि इससे विश्व युद्ध 3 शुरू हो सकता है.
आखिर क्यों खास है खार्ग आइलैंड ?
ये आइलैंड ईरान से 25 किलोमीटर दूर उत्तरी फारस की खाड़ी में मौजूद एक छोटा सा कोरल द्वीप है. जिसकी लंबाई ज्यादा कुछ किलोमीटर है. साल 1960 के दशक में अमेरिकी तेल कंपनी अमोको ने इसे बनाया था. आज ये द्वीप ईरान का मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल है. यहां हर दिन 70 लाख बैरल तेल लोड किया जा सकता है.
आपको बता दें कि बिना इस द्वीप के ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह नीचे गिर जाएगी. पूर्व अमेरिकी विशेष दूत ने कहा है कि इस द्वीप के बिना ईरान की अर्थव्यवस्था गर्त में चली जाएगी.
अमेरिका- इजरायल ने क्यों नहीं छुआ यह द्वीप
अब सवाल ये है कि आखिर अमेरिका ने ईरान के इस तेल ठिकाने पर हमला क्यों नहीं किया. इसका कारण ये है कि इस द्वीप पर हमला करने से ईरान की अर्थव्यवस्था तो बर्बाद हो ही जाएगी लेकिन इससे दुनिया भर के तेल बाजार में भी भारी उथल-पुथल मचेगी. और तेल की कीमतें बहुत ऊंची हो जाएंगी. वहीं चीन सबसे ज्यादा प्रभावित होगा क्योंकि वो ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है.
वहीं दूसरी तरफ ये द्वीप नष्ट हुआ तो ईरान बौखला जाएगा और हो सकता है कि वो पूरे क्षेत्र में बहुत बड़े हमले कर दे और युद्ध विश्व स्तर पर फैल जाए.
कैसा है द्वीप और क्या है कमजोरियां ?
इस आइलैंड पर ऑयल के बड़े-बड़े भंडार टैंक दक्षिणी हिस्से में एक साथ लगे हुए हैं. लंबी जेटी समुद्र में निकली हुई हैं जहां सुपर टैंकर तेल भरते हैं. समुद्र के नीचे पाइपलाइन मुख्य भूमि के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं. पूरा द्वीप बहुत छोटा और खुला है इसलिए हवाई हमले में इसे नष्ट करना आसान है लेकिन अमेरिका जानबूझकर ऐसा नहीं कर रहा. अगर हमला हुआ तो ईरान जवाब में होर्मुज स्ट्रेट बंद कर सकता है जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. इससे पूरी दुनिया में तेल संकट आ जाएगा.
विश्व युद्ध का खतरा क्यों ?
अमेरिका या इजरायल ने अगर खार्ग आइलैंड पर हमला किया तो ईरान इसे अपना अस्तित्व का सवाल मान लेगा. ईरान की अर्थव्यवस्था का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी तेल निर्यात पर टिका है. हमले के बाद ईरान न सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट बंद कर सकता है बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले कर सकता है. चीन और दूसरे देश भी प्रभावित होंगे.
कई विश्लेषक कहते हैं कि यह कदम इतना बड़ा होगा कि ईरान के सहयोगी देश भी युद्ध में कूद पड़ेंगे. इससे वर्ल्ड वॉर 3 शुरू हो सकता है. इसलिए अमेरिका इस द्वीप को अभी छोड़ रहा है ताकि युद्ध सीमित रहे और बाद में बातचीत का रास्ता खुला रहे.
अभी के हालात और आगे का भविष्य
अभी तक खार्ग आइलैंड पूरी तरह सामान्य रूप से काम कर रहा है. फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हमलों के बावजूद यहां तेल लोडिंग जारी है. लेकिन युद्ध अगर और बढ़ा तो अमेरिका-इजरायल को इस द्वीप पर भी हमला करना पड़ सकता है. फिलहाल दोनों देश इसे रेड लाइन मान रहे हैं.
पूरी दुनिया इस छोटे से द्वीप पर नजर रखे हुए है क्योंकि इसका फैसला न सिर्फ ईरान की किस्मत बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और शांति पर असर डालेगा. खार्ग आइलैंड वाकई ईरान की जीवनरेखा है और इसे छूना मतलब आग से खेलना साबित होगा. इसलिए इस आइलैंड पर हमला करने से बच रहा है.







