मंत्रालय में कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन, 19 मांगों के साथ सरकार को चेतावनी

सार:

मध्य प्रदेश के वल्लभ भवन स्थित मंत्रालय में लंबे समय से उपेक्षित अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी 19 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन का निर्णय लिया है। संघ का आरोप है कि प्रदेश के अन्य विभागों और संवर्गों को पहले ही चौथा समयमान वेतनमान दिया जा चुका है, लेकिन मंत्रालय के कर्मचारियों को अब तक यह लाभ नहीं मिला। इसके अलावा, कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना, सातवां वेतनमान, आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकार और आकस्मिकता निधि कर्मचारियों की नियमितीकरण परीक्षा सहित अन्य मांगें लंबित हैं। आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन सरकार पर दबाव डालने वाला और निर्णायक होगा। 

विस्तार:

भोपाल के वल्लभ भवन में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से न्यायोचित मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मंत्रालय सेवा अधिकारी/कर्मचारी संघ की कार्यकारिणी समिति ने इस उपेक्षा को देखते हुए आपात बैठक बुलाई और आंदोलन करने का निर्णायक निर्णय लिया।

संघ के अध्यक्ष इंजी सुधीर नायक ने बताया कि प्रदेश के अन्य विभागों को चौथा समयमान वेतनमान मिल चुका है, लेकिन मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारियों को अभी तक यह लाभ नहीं दिया गया। उन्होंने इसे “घोर अन्याय” बताया और कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 9 मार्च 2020 को सभी विभागों को निर्देशित किया था कि समयमान वेतनमान लागू करके पदोन्नति का रास्ता खोला जाए।

उन्होंने आगे बताया कि पांच विभागों—कोष एवं लेखा, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, जनजातीय कार्य आदि—ने इन निर्देशों का पालन किया, लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने स्वयं के निर्देशों को लागू नहीं किया।

संघ ने कुल 19 सूत्रीय मांगें तय की हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • चौथा समयमान वेतनमान का तत्काल लागूकरण।

  • कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना की त्वरित शुरुआत।

  • स्थायी कर्मचारियों के लिए सातवां वेतनमान।

  • आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन, उचित काम के घंटे और अवकाश।

  • आकस्मिकता निधि कर्मचारियों की नियमितीकरण परीक्षा का शीघ्र परिणाम।

  • फुल पेंशन के लिए न्यूनतम सेवा अवधि में सुधार।

  • अन्य विभागीय और व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान।

संघ ने अन्य संगठनों और विभागों से भी सहयोग की अपील की है। विशेष रूप से विधानसभा, विधि विभाग और राजभवन के कर्मचारी अभी तक चौथा समयमान वेतनमान नहीं पा सके हैं, इसलिए उन्हें आंदोलन में शामिल होने का अनुरोध किया गया है।

आंदोलन की रूपरेखा और चरणबद्ध कार्यक्रम शीघ्र घोषित किए जाएंगे। संघ ने पहले ही सामान्य प्रशासन विभाग और मुख्य सुरक्षा अधिकारी को आंदोलन की सूचना दे दी है। संघ का कहना है कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन निर्णायक रूप से सरकार पर दबाव डालेगा।

इंजी सुधीर नायक ने कहा, “हमने धैर्य की सीमा पार कर ली है। वर्षों की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं हो रही। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन तेज होगा और प्रदेश स्तर पर प्रभाव डालेगा।”

यह आंदोलन मध्य प्रदेश के मंत्रालय में कार्यरत हजारों अधिकारी-कर्मचारियों के आत्मसम्मान और न्याय की लड़ाई है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि सरकार को अब जागना होगा, अन्यथा स्थिति और बिगड़ सकती है।

  • Shree Vishwakarma

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