ट्रम्प का बड़ा दावा: ईरान युद्ध में 51 जहाज डुबोए, पुतिन से फोन पर चर्चा

ट्रम्प ने ईरान जंग पर पुतिन से बात की: कहा- रूस लड़ाई खत्म कराने में मददको तैयार, 51 ईरानी जहाज डुबोने का दावा

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत हुई, जिसमें मध्य-पूर्व की स्थिति और युद्ध समाप्त करने के रास्तों पर चर्चा हुई। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई में अब तक ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और लगभग 51 जहाज समुद्र में डुबो दिए गए हैं। उनका कहना है कि रूस भी इस संघर्ष को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने को तैयार दिख रहा है।

विस्तार

ट्रम्प और पुतिन के बीच फोन पर बातचीत

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की। ट्रम्प के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच मध्य-पूर्व की स्थिति, ईरान युद्ध और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

ट्रम्प ने कहा कि पुतिन का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला युद्ध किसी भी देश के लिए लाभकारी नहीं है। इसलिए रूस इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में मदद कर सकता है। बातचीत के दौरान यूक्रेन और अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।

ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई में ईरान की नौसेना को भारी क्षति पहुंची है। उनके अनुसार अब तक लगभग 51 ईरानी नौसैनिक जहाज नष्ट या डुबो दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि लगातार हमलों के कारण ईरान की समुद्री ताकत लगभग खत्म हो चुकी है और उसकी अधिकांश नौसेना समुद्र की गहराइयों में चली गई है। इस अभियान में ईरान के मिसाइल लॉन्च सिस्टम, ड्रोन उत्पादन केंद्र और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की पनडुब्बियों और नौसैनिक बेड़े ने कई अहम ऑपरेशन चलाए हैं, जिनमें एक बड़े ईरानी युद्धपोत को भी टॉरपीडो से डुबो दिया गया। यह घटना आधुनिक दौर में बेहद दुर्लभ मानी जा रही है।

कैसे शुरू हुआ यह बड़ा युद्ध

फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर संयुक्त हमले शुरू किए थे। इन हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ गया और कई देशों ने सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं।

इन हमलों के दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व और कई सैन्य अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद ईरान ने अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव शुरू हो गया।


होर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक तेल सप्लाई पर असर

इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।

युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

ट्रम्प का दावा – युद्ध जल्द खत्म हो सकता है

ट्रम्प का कहना है कि सैन्य अभियान अपने लक्ष्य के करीब पहुंच चुका है और ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है। उनका दावा है कि अगर हालात इसी तरह बने रहे तो यह युद्ध अपेक्षा से जल्दी समाप्त हो सकता है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील है और किसी भी समय नया मोड़ आ सकता है। कई देशों ने युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की अपील भी की है।

  • gaurav singh rajput

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