बगंला बाबू सावधान! ACS के ‘हंटर’ से उड़ी रसूखदारों की नींद, अब संभागों में भी खाली होंगे सरकारी आवास

मध्य प्रदेश के सरकारी गलियारों में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। मामला उन रसूखदार नेताओं और अफसरों से जुड़ा है, जो अपना कार्यकाल या समय सीमा समाप्त होने के बाद भी ‘सरकारी बंगलों’ को अपनी जागीर समझकर कुंडली मारकर बैठे हैं। ब्रांडवाणी समाचार को मिली जानकारी के अनुसार, सरकार के एक सख्त फैसले और एक जांबाज अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी की पहल ने इन ‘स्थायी मेहमानों’ की रातों की नींद उड़ा दी है।

प्रदेश सरकार ने हाल ही में अवैध रूप से बंगलों पर कब्जा जमाए रखने वालों पर लगाम कसने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। इसके तहत तय समय सीमा बीतने के बाद यदि कोई बंगला खाली नहीं करता है, तो उससे वसूला जाने वाला किराया कई गुना बढ़ा दिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में यह सख्ती केवल राजधानी भोपाल तक सीमित रखी गई थी, लेकिन अब इसकी आंच पूरे प्रदेश में पहुंचने लगी है।

कहते हैं कि नियम कितने भी सख्त हों, उन्हें लागू करने के लिए इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। एक तेजतर्रार ACS स्तर के अधिकारी ने इस मामले में खुद कमान संभाली है। उन्होंने स्वतः संज्ञान लेते हुए अपने संभाग में भी राजधानी जैसी ही सख्ती लागू करने के निर्देश दे दिए हैं।

बता दें कि ‘साहब’ का यह अंदाज नया नहीं है। जब वे राजधानी के एक प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान में पदस्थ थे, तब भी उन्होंने अवैध कब्जा जमाए बैठे कई रसूखदार अफसरों से सरकारी बंगले खाली कराए थे। अब उनके इस कदम से संभाग के उन लोगों में हड़कंप है, जिन्होंने सरकारी बंगले को अपना ‘स्थायी निवास’ मान लिया था।

प्रदेश के कई बड़े शहरों में यह परंपरा सी बन गई है कि तबादला होने या रिटायर होने के बावजूद रसूख के दम पर सरकारी आवास खाली नहीं किए जाते। लेकिन अब सरकार और प्रशासन के इस संयुक्त ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से उन अफसरों और नेताओं के पास दो ही विकल्प बचे हैं

या तो बंगला खाली करें, या फिर अपनी जेब खाली करने के लिए तैयार रहें।

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  • Shruti Soni

    Shruti Soni

    अनुभवी पत्रकार। हर दिन ताज़ा और सटीक खबरों के साथ आपकी सेवा में। निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहराई से तथ्य प्रस्तुत करना मेरी पहचान है।

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