
EOW, लोकायुक्त और CBI की बोलती बंद, वसूली के गंभीर आरोपों के बाद भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ तबादले का झुनझुना! ब्रांडवाणी समाचार का बड़ा प्रहार।
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दम भरने वाली डॉ. मोहन यादव सरकार और मुख्य सचिव अनुराग जैन की प्रशासनिक व्यवस्था क्या एक प्रोफेसर के रसूख के आगे पूरी तरह बेबस हो चुकी है? यह सवाल हम नहीं, बल्कि सूबे के प्रशासनिक गलियारों में चल रही वो सुगबुगाहट कह रही है, जिसने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
मामला है डॉ. सुनील मडेरिया का। वही डॉ. मडेरिया, जिन पर काम करने वालों से जबरन वसूली करने जैसे बेहद गंभीर और संगीन आरोप हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जिन मामलों में बड़ी-बड़ी एजेंसियां तत्काल शिकंजा कस लेती हैं, वहाँ डॉ. मडेरिया के रसूख के आगे सरकार की हिम्मत जवाब देती नजर आ रही है।

जो EOW, जो लोकायुक्त और जो CBI किसी भी रसूखदार की जांच शुरू करने में पल भर की भी देरी नहीं करतीं, आज वो एक प्रोफेसर के सामने डरी और सहमी सी दिखाई दे रही हैं। आम जनता की शिकायतों का तुरंत निपटारा करने का दावा करने वाली ‘सीएम हेल्पलाइन’ आज इस मामले में लाचार और मजबूर नजर आ रही है। सबसे बड़ा और तीखा सवाल तो सूबे के मुखिया डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन की प्रशासनिक साख पर उठता है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि इतने गंभीर आरोपों के बाद भी डॉ. सुनील मडेरिया पर न तो कोई उच्च स्तरीय जांच बैठाई गई और न ही उन्हें निलंबित (suspend) करने का साहस दिखाया गया?
भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के इतने गंभीर आरोपों के बाद कायदे से जिस व्यक्ति को नौकरी से सीधे बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था, उसे सरकार ने केवल ट्रांसफर यानी तबादले का इनाम देकर छोड़ दिया। कार्रवाई के नाम पर यह महज एक खानापूर्ति है, जो साफ इशारा करती है कि कहीं न कहीं तंत्र पर कोई अदृश्य दबाव काम कर रहा है। हद तो तब हो जाती है जब प्रशासनिक गलियारों से यह खबर आती है कि यह महाशय एक बार फिर किसी नई और रसूखदार कुर्सी पर काबिज होने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
ब्रांडवाणी समाचार इस ढुलमुल रवैए और भ्रष्टाचार को शह देने वाली नीति पर चुप बैठने वाला नहीं है। हम सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन से यह मांग करते हैं कि डॉ. सुनील मडेरिया के खिलाफ लगे तमाम आरोपों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा सिर्फ कागजी है।
जब तक सरकार और मुख्य सचिव दोनों की आंखें नहीं खुलतीं और इस मामले में कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, ब्रांडवाणी समाचार पूरी प्रखरता के साथ जनता की आवाज उठाता रहेगा और सत्ता के गलियारों में बैठे जिम्मेदार लोगों से यह तीखे सवाल पूछता रहेगा।
देखते रहिए ब्रांडवाणी समाचार, निष्पक्षता का दूसरा नाम।








