संसद में संख्या बल का नया समीकरण, संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी?

नई दिल्ली। देश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर एक बार फिर देश में संख्या बल और गठबंधन की राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार आगामी समय में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को दोबारा पटल पर लाने की तैयारी में है। इसके लिए संसद में आवश्यक ‘विशेष बहुमत’ जुटाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

विधेयक के लिए क्यों जरूरी है 362 सांसदों का समर्थन?

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।

यदि लोकसभा के सभी 543 सदस्य मतदान में हिस्सा लेते हैं, तो विधेयक पारित कराने के लिए 362 सांसदों  के समर्थन की आवश्यकता होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल माह में सरकार द्वारा लाया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (352 वोट) न मिल पाने के कारण पारित नहीं हो सका था। उस समय विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 मत पड़े थे।

प्रस्तावित विधेयक का मुख्य उद्देश्य

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा की अधिकतम सीटों को 550 से बढ़ाकर 850 करना और संविधान के अनुच्छेद 81 व 82 में आवश्यक संशोधन करना है। तर्क दिया जा रहा है कि वर्ष 2029 तक महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह से लागू करने के लिए इस परिसीमन विधेयक का पारित होना अनिवार्य है। एनडीए के सहयोगी दलों, जैसे कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी इस बात की पुष्टि की है कि महिला आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया को साथ-साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

लोकसभा में सीटों का वर्तमान गणित

संसद के भीतर इस विशेष बहुमत के आंकड़े को छूने के लिए विभिन्न दलों के सांसदों के पाला बदलने और नए राजनीतिक समीकरणों का दौर देखा जा रहा है। वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो:

* वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए का संख्या बल बहुमत के आंकड़े (272) से अधिक, यानी 292 था।

* हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के तहत, जून माह में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के कई सांसदों के रुख में बदलाव की खबरें आई हैं।

* कथित तौर पर टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों और शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों के बागी रुख अपनाने या अन्य दलों के साथ विलय करने से सत्ता पक्ष का आंकड़ा बढ़कर 318 के करीब पहुंचता दिख रहा है।

318 सांसदों के इस संभावित समर्थन के बावजूद, संविधान संशोधन के लिए आवश्यक 362 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए सरकार को अभी भी 44 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी मानसून सत्र में इस विधेयक को दोबारा लाए जाने की संभावनाओं के बीच, आने वाले दिनों में विपक्षी और क्षेत्रीय दलों के सांसदों के बीच यह जोड़-तोड़ और संख्या बल जुटाने की कोशिशें और तेज हो सकती हैं।

 

 

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gaurav singh rajput

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