
सागर/मनीष कुमार चौबे की रिपोर्ट: महिलाओं को हिंसा, उत्पीड़न और पारिवारिक प्रताड़ना जैसी समस्याओं से राहत दिलाने तथा उन्हें एक ही स्थान पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर सागर जिले में महिलाओं के लिए प्रभावी सहायता केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। वर्ष 2017 से संचालित इस केंद्र ने अब तक 5500 से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है।
वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य हिंसा या संकट का सामना कर रही महिलाओं को एक ही छत के नीचे परामर्श, विधिक सहायता, पुलिस सहायता, चिकित्सा सेवाएं, अस्थायी आश्रय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। घरेलू हिंसा, पारिवारिक विवाद, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न सहित विभिन्न परिस्थितियों से जूझ रही महिलाओं को यहां त्वरित सहायता और न्याय दिलाने का प्रयास किया जाता है। वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक रक्षा तिवारी ने बताया कि केंद्र में आने वाले अधिकांश मामले घरेलू हिंसा और पारिवारिक प्रताड़ना से जुड़े होते हैं। पीड़ित महिलाओं को उनकी परिस्थितियों के अनुसार मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुलिस सहायता, कानूनी मार्गदर्शन, चिकित्सा सुविधाएं और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही परिवारों के बीच संवाद स्थापित कर विवादों का समाधान और पारिवारिक पुनर्वास कराने का भी प्रयास किया जाता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक केंद्र में लगभग साढ़े पांच हजार मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से साढ़े चार हजार से अधिक मामले घरेलू हिंसा से संबंधित रहे हैं। इन मामलों में 250 से अधिक महिलाओं को विधिक सहायता प्रदान की गई, जबकि 100 से अधिक महिलाओं को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा चार हजार से अधिक महिलाओं का सफलतापूर्वक पारिवारिक पुनर्वास कराया गया, जिससे वे अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी सकीं। वन स्टॉप सेंटर केवल सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संकटग्रस्त महिलाओं और किशोरियों के पुनर्वास तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए भी लगातार कार्य कर रहा है। इसका एक उदाहरण आयरा (परिवर्तित नाम) नामक किशोरी का मामला है। पारिवारिक विवाद के कारण किशोरी अपने घर से अलग होकर बंडा थाने पहुंच गई थी। स्थिति ऐसी थी कि उसके माता-पिता उसे वापस घर ले जाने के लिए तैयार नहीं थे।
बंडा थाना पुलिस द्वारा किशोरी को सुरक्षित आश्रय के लिए वन स्टॉप सेंटर भेजा गया, जहां उसे भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया गया। बातचीत के दौरान किशोरी ने अपने परिवार के साथ वापस रहने की इच्छा जताई। इसके बाद वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक और काउंसलर ने किशोरी के परिवार से लगातार संपर्क कर उनकी काउंसलिंग की। कई दौर की बातचीत और समझाइश के बाद परिवार को सहमत किया गया और अंततः किशोरी के पिता उसे घर वापस ले जाने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद किशोरी खुशी-खुशी अपने परिवार के साथ वापस घर चली गई। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को केवल तात्कालिक सहायता ही नहीं देता, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करता है। केंद्र की सेवाओं का लाभ लेकर हजारों महिलाएं अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने में सफल हुई हैं।
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