AI के बढ़ते असर के बीच इंजीनियरों की नई रणनीति, ‘शैडो थिंकिंग’ और जंक कोड से AI को कर रहे कन्फ्यूज

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, कंटेंट क्रिएशन, डेटा एनालिसिस, डिजाइन और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में AI आधारित टूल्स ने काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। जहां एक ओर कंपनियां AI की मदद से उत्पादकता बढ़ाने और लागत कम करने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर तकनीकी पेशेवरों के बीच यह चिंता भी बढ़ रही है कि कहीं AI उनके वर्षों के अनुभव और विशेषज्ञता की जगह न ले ले। इसी चुनौती के बीच अब कई इंजीनियर नई रणनीतियां अपनाते दिखाई दे रहे हैं।

तकनीकी जगत में इन दिनों ‘शैडो थिंकिंग’ (Shadow Thinking) शब्द तेजी से चर्चा में है। इसका मतलब ऐसी कार्यशैली से है जिसमें इंजीनियर अपने वास्तविक निर्णय लेने की प्रक्रिया, समस्या सुलझाने की तकनीक और महत्वपूर्ण अनुभव को पूरी तरह AI के सामने उजागर नहीं करते। वे अंतिम समाधान तो तैयार करते हैं, लेकिन उस तक पहुंचने की पूरी सोच, तर्क और कार्यप्रणाली AI टूल्स के जरिए साझा नहीं करते। इससे AI उनके अनुभव से पूरी तरह सीख नहीं पाता और मानवीय विशेषज्ञता का महत्व बना रहता है।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कुछ डेवलपर्स ‘जंक कोड’ (Junk Code) या अनावश्यक कोड का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका उद्देश्य AI मॉडल को भ्रमित करना नहीं, बल्कि अपने मूल लॉजिक और कार्यशैली को सीधे मशीन लर्निंग सिस्टम द्वारा समझे जाने से बचाना बताया जा रहा है। हालांकि, सभी विशेषज्ञ इस तरीके का समर्थन नहीं करते। उनका मानना है कि जानबूझकर खराब या अनावश्यक कोड लिखना भविष्य में टीमवर्क, सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता और रखरखाव के लिए समस्या बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि AI बड़ी मात्रा में उपलब्ध डेटा से सीखने में सक्षम है, लेकिन उसके पास इंसानों जैसा वास्तविक अनुभव, परिस्थितियों की समझ, रचनात्मक सोच, नैतिक निर्णय क्षमता और व्यावहारिक विवेक अभी भी सीमित है। यही वजह है कि जटिल परियोजनाओं, संवेदनशील निर्णयों और नवाचार आधारित कार्यों में अनुभवी इंजीनियरों की भूमिका आज भी बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI एक सहायक उपकरण हो सकता है, लेकिन पूरी तरह मानव विशेषज्ञता का विकल्प नहीं।

कॉर्पोरेट जगत में भी AI को लेकर दो तरह की सोच दिखाई दे रही है। कुछ कंपनियां कर्मचारियों को AI टूल्स का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं, जबकि कुछ संगठन यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि संवेदनशील सोर्स कोड, एल्गोरिदम और व्यापारिक गोपनीयता AI प्लेटफॉर्म तक अनावश्यक रूप से न पहुंचे। इसके लिए कई कंपनियों ने आंतरिक AI नीतियां और डेटा सुरक्षा दिशानिर्देश भी लागू किए हैं।

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gaurav singh rajput

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