आगरा के अस्पतालों में मानकों की खुली पोल, ICU में डॉक्टर नहीं और OT में गंदगी

आगरा शहर के निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी मानकों की स्थिति जांच में सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। विभाग की ओर से किए गए निरीक्षण में कई अस्पतालों में गंभीर कमियां मिलीं। कहीं ICU में विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी नहीं मिली तो कहीं ऑपरेशन थिएटर की साफ-सफाई और जरूरी व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं।

140 निजी अस्पतालों की हुई जांच

स्वास्थ्य विभाग ने आगरा में 140 निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में अस्पताल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर पाए। जांच में सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अस्पतालों से जवाब मांगा जा रहा है।

निरीक्षण का मकसद यह देखना था कि निजी अस्पतालों में मरीजों को इलाज की सुविधा निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार मिल रही है या नहीं। अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, ICU की व्यवस्था, ऑपरेशन थिएटर, प्रशिक्षित स्टाफ, साफ-सफाई और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की जांच की गई।

ICU में विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल

निरीक्षण के दौरान कुछ अस्पतालों की ICU व्यवस्था में भी गंभीर कमियां मिलीं। ICU जैसे संवेदनशील विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है, लेकिन जांच में कुछ अस्पताल इस मानक पर खरे नहीं उतरे।

इसके अलावा प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। इससे गंभीर मरीजों के इलाज और आपात स्थिति में अस्पताल की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

ऑपरेशन थिएटर में सफाई व्यवस्था खराब

अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर की स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था भी जांच के दायरे में रही। निरीक्षण के दौरान कुछ जगहों पर ऑपरेशन थिएटर की साफ-सफाई संतोषजनक नहीं मिली।

ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण का खतरा कम रखने के लिए साफ-सफाई और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी होता है। ऐसे में मानकों की अनदेखी मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।

स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की कार्रवाई

जांच में कमियां सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित अस्पतालों को अपनी कमियों को दूर करने और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य केवल अस्पतालों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि मरीजों को सुरक्षित और मानक के अनुरूप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी है।

लापरवाही मिली तो लाइसेंस पर भी संकट

अस्पतालों की जांच में सामने आई कमियों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि अस्पताल निर्धारित मानकों का पालन करने में विफल पाए जाते हैं या गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं, तो उनके लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की इस जांच से निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, डॉक्टरों की उपलब्धता और चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद कितने अस्पताल कमियां दूर करते हैं और किन अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई होती है।

 
 
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  • Manisha Gupta

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