
उमरिया/ राकेश दर्दवंशी: जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम मालाचुआ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का कलेक्टर के निरीक्षण में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आ गई। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद कलेक्टर स्थानीय महिला को साथ लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। यहां एक महिला को टिटनेस का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर बाहर से दवा लाने के लिए कहे जाने का मामला सामने आया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और स्टाफ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
ग्रामीण महिला को नहीं मिला टिटनेस का इंजेक्शन
मामला उस समय सामने आया जब कलेक्टर ग्रामीण महिला को साथ लेकर मालाचुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। आरोप है कि संबंधित महिला टिटनेस का इंजेक्शन लगवाने स्वास्थ्य केंद्र आई थी, लेकिन उसे वहां दवा उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर बाहर से इंजेक्शन खरीदकर लाने के लिए कहा गया।
बताया गया कि महिला की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह बाहर से इंजेक्शन खरीद सके। पैसे नहीं होने के कारण उसे बिना उपचार के ही वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों की शिकायत के बाद जब यही महिला कलेक्टर के साथ स्वास्थ्य केंद्र पहुंची तो वहां मौजूद कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।
निरीक्षण के दौरान सामने आई अलग-अलग बातें
ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को पर्याप्त दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। उनका कहना है कि दूरदराज के गांवों से लोग इलाज की उम्मीद लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, लेकिन कई बार सामान्य दवाओं के अलावा उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पाता।
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
दवाओं की कमी को लेकर उठे सवाल
मालाचुआ स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण के बाद जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई स्वास्थ्य केंद्रों पर जीवनरक्षक और जरूरी दवाओं की कमी बनी रहती है।
ग्रामीणों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने वाले मरीजों को अक्सर सीमित दवाएं ही मिल पाती हैं। ऐसे में गरीब और दूरदराज के लोगों को इलाज के लिए निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ता है।
कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के निर्देश
निरीक्षण के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया। मामले में स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर के निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग की स्थानीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई होती है और स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं व उपचार की व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर सवाल
मालाचुआ की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का उद्देश्य गरीब और ग्रामीण आबादी को आवश्यक इलाज और दवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि मरीजों को जरूरी इंजेक्शन और दवाओं के लिए बाहर भेजा जाता है तो इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जिनके पास निजी इलाज का खर्च उठाने की क्षमता नहीं है।
फिलहाल कलेक्टर के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य केंद्र के संचालन की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
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