एनालॉग पनीर पर सरकार सख्त, खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई तेज; जानें क्या है मामला

भोपाल। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर और अन्य डेयरी एनालॉग उत्पादों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश में ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक लगाई गई है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने अलग-अलग जिलों में जांच और सैंपलिंग का अभियान तेज कर दिया है। 

क्या है एनालॉग पनीर और क्यों लगाया गया प्रतिबंध?

एनालॉग पनीर ऐसे उत्पादों को कहा जाता है जो असली दूध से बने पनीर की तरह दिखते हैं, लेकिन उनमें दूध की जगह वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब ऐसे उत्पादों की सही जानकारी उपभोक्ता को नहीं दी जाती और उन्हें सामान्य पनीर के रूप में बेचा जाता है।

मध्य प्रदेश खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में पनीर के 921 नमूनों की जांच की गई थी। इनमें 123 नमूने अमानक पाए गए। विभाग के अनुसार 98 नमूनों में बीआर रीडिंग और 25 नमूनों में फैट प्रतिशत निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिला। 

सरकार का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को असली डेयरी उत्पाद और एनालॉग उत्पाद के बीच स्पष्ट अंतर उपलब्ध कराना है।

कई जिलों में छापेमारी और सैंपलिंग

प्रतिबंध के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने डेयरी इकाइयों, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच शुरू की है। इंदौर में कार्रवाई के दौरान करीब 800 किलो संदिग्ध पनीर और 1,016 किलो मावा जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई। नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। 

सीहोर में भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने एक डेयरी पर कार्रवाई कर करीब 25 क्विंटल संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त किया। अधिकारियों ने इसके नमूने जांच के लिए भेजे हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जब्त सामग्री वास्तव में एनालॉग पनीर है या नहीं। 

रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल संदिग्ध उत्पाद मिलने के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। जब्त सामग्री के नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट में नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिबंध के दायरे में ऐसे गैर-दुग्ध उत्पाद आते हैं जो किसी मानकीकृत डेयरी उत्पाद की नकल करते हों और उपभोक्ता को भ्रमित करते हों। वहीं फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे अलग मानकों वाले उत्पाद इस रोक के दायरे में नहीं हैं।

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