
खरगापुर।धर्मेंद्र सिंह लोधी | ग्राम पंचायत भेलसी में हाईवे रोड स्थित भूमि को लेकर विवाद सामने आया है। भूमि स्वामी चढ़ार ने आरोप लगाया है कि एसडीएम बल्देवगढ़ के यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। पीड़ित ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
3 अगस्त को जारी हुआ था स्थगन आदेश
पीड़ित के अनुसार विवादित भूमि खसरा नंबर 1186, रकबा 0.5550 हेक्टेयर है। भूमि को लेकर चल रहे विवाद के बीच एसडीएम बल्देवगढ़ ने 3 अगस्त 2026 को मौके की यथास्थिति बनाए रखने का स्थगन आदेश जारी किया था।
स्वामी चढ़ार का कहना है कि आदेश के पालन के लिए बल्देवगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस ने निर्माण कार्य करा रहे जुगला कुशवाहा और जानकी कुशवाहा को स्थगन आदेश की प्रति उपलब्ध कराई और निर्माण कार्य रुकवा दिया।
पीड़ित का आरोप है कि पुलिस टीम के वापस लौटने के बाद विवादित भूमि पर फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि मौके पर सीमेंट और सरिया से काम कराया गया तथा जाल और नेट लगाने का कार्य भी किया गया।
आदेश के बावजूद निर्माण कैसे शुरू हुआ?
स्वामी चढ़ार ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन की ओर से भूमि की यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था, तो उसके बावजूद निर्माण कार्य दोबारा कैसे शुरू हुआ।
पीड़ित ने संबंधित राजस्व और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण जारी रहने के पीछे कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। साथ ही स्थगन आदेश का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और नियम विरुद्ध निर्माण पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित ने सुरक्षा की भी मांग की
स्वामी चढ़ार ने यह भी आरोप लगाया कि दलित होने के कारण उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
पीड़ित का कहना है कि यदि प्रशासनिक आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
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