
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी से अलग हुए 20 बागी सांसदों की लोकसभा सदस्यता का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस ने इन सांसदों की अयोग्यता याचिका पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा फैसला लेने में हो रही देरी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी की अर्जी और मुख्य मांग
यह याचिका टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के माध्यम से शीर्ष अदालत में दाखिल की गई है। टीएमसी ने अपनी याचिका में मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को निर्देश जारी करे कि वे दलबदल कानून के तहत दायर अयोग्यता याचिकाओं पर एक निश्चित और समयबद्ध सीमा के भीतर फैसला लें। टीएमसी का तर्क है कि सांसदों ने जिस दल के चुनाव चिह्न और टिकट पर जीत दर्ज की थी, उसे छोड़ने के बाद संवैधानिक नियमों के तहत उनकी संसद सदस्यता तुरंत समाप्त की जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद पार्टी से अलग हो गए थे और उन्होंने ‘नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ में शामिल होने का फैसला किया था। इस कदम के तुरंत बाद टीएमसी ने संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि उन्होंने लंबे समय से इस पर कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अध्यक्ष कार्यालय की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
स्पीकर से मुलाकात और पत्र का नहीं हुआ असर
न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करने से पहले अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अयोग्यता याचिकाओं पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की थी। इसके अलावा, अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी समेत टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने व्यक्तिगत रूप से स्पीकर से मुलाकात कर बागी सांसदों को तत्काल अयोग्य घोषित करने का आग्रह भी किया था। बावजूद इसके, कोई ठोस निर्णय न आने के बाद पार्टी को सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा।
मामले का राजनीतिक महत्व
यह मामला राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। लोकसभा में बागी सांसदों को अलग बैठने की व्यवस्था तो दी जा चुकी है, लेकिन उनके नए दल में विलय और formal मान्यता का मुद्दा अभी भी लटका हुआ है। इस बीच राजनीतिक हलचल भी तेज रही है; हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दिल्ली में इन बागी सांसदों के साथ बैठक की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इन सांसदों की मुलाकात की खबरें सामने आई थीं। अब मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।
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