
सार
कुलदीप शर्मा|छतरपुर। ई-टोकन प्राप्त किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराने और किसानों से कथित दुर्व्यवहार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने दो उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। कार्रवाई बिजावर के राय कृषि बीज भंडार और ईशानगर के शिवांश खाद भंडार के खिलाफ की गई है। दोनों विक्रेताओं के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद अनुज्ञापन अधिकारी सह उप संचालक कृषि ने उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कार्रवाई की।
विस्तार
छतरपुर। किसानों को ई-टोकन के आधार पर नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। ई-विकास प्रणाली के तहत शत-प्रतिशत उर्वरक वितरण सुनिश्चित करने के शासन के निर्देशों के बीच ई-टोकन वाले किसानों को खाद नहीं देने और उनके साथ दुर्व्यवहार की शिकायतों पर जिले के दो उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं।
बिजावर स्थित मेसर्स राय कृषि बीज भंडार, प्रोपराइटर अंबिका प्रसाद राय के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई थी कि ई-टोकन प्राप्त किसानों को उर्वरक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। साथ ही किसानों से गलत तरीके से बात करने की शिकायत भी सामने आई थी।
मामले में संबंधित विक्रेता से स्पष्टीकरण मांगा गया। विभाग के अनुसार प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद अनुज्ञापन प्राधिकारी सह उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास डॉ. अनिल कुमार मिश्रा ने उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत फर्म का उर्वरक विक्रय लाइसेंस निरस्त कर दिया।
इसी तरह मेसर्स शिवांश खाद भंडार, ईशानगर, प्रोपराइटर आशीष सिंह परिहार के विरुद्ध भी ई-टोकन वाले किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराने और किसानों से दुर्व्यवहार की शिकायत प्राप्त हुई थी।
विभाग की ओर से संबंधित विक्रेता से 27 अगस्त 2026 तक स्पष्टीकरण मांगा गया था। विभाग के अनुसार प्राप्त जवाब संतोषप्रद नहीं पाया गया। इसके बाद शिवांश खाद भंडार का उर्वरक विक्रय लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-विकास प्रणाली के तहत ई-टोकन प्राप्त किसानों को नियमानुसार उर्वरक उपलब्ध कराना अनिवार्य है। किसानों को खाद वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता, मनमानी या दुर्व्यवहार की शिकायत मिलने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विभाग की इस कार्रवाई को खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उर्वरक उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर खरीफ सीजन में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना कृषि कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
शेष स्टॉक बेचने के लिए 30 दिन की अनुमति
लाइसेंस निरस्त किए जाने के बावजूद दोनों प्रतिष्ठानों के पास मौजूद शेष उर्वरक स्टॉक को लेकर भी विभाग ने व्यवस्था तय की है। मेसर्स राय कृषि बीज भंडार और मेसर्स शिवांश खाद भंडार को उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के प्रावधानों के तहत शेष स्टॉक को 30 दिनों के भीतर नियमानुसार बेचने की अनुमति दी गई है।
निर्धारित 30 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद यदि उर्वरक स्टॉक शेष रहता है तो उसका अधिग्रहण किया जाएगा। कृषि विभाग ने विक्रेताओं को यह संदेश भी दिया है कि किसानों को ई-टोकन के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराने में किसी तरह की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। किसानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और शासन की निर्धारित वितरण व्यवस्था का पालन करना विक्रेताओं की जिम्मेदारी है।
इस कार्रवाई के बाद जिले में उर्वरक वितरण व्यवस्था पर विभाग की निगरानी और सख्त होने की उम्मीद है। वहीं किसानों को भी ई-टोकन से जुड़ी किसी समस्या या खाद वितरण में अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को शिकायत करने की सलाह दी गई है।
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