
सार
मुरैना नगर निगम में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दायर कई आवेदन लंबे समय से लंबित होने का मामला सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम में मांगी गई सूचनाओं का समय पर जवाब नहीं दिया जा रहा है। निर्माण कार्यों, टेंडरों, स्वच्छता बजट और अवैध कब्जों से जुड़ी जानकारी मांगने वाले आवेदकों को कथित तौर पर लंबे समय से जवाब का इंतजार है। मामले में जिला प्रशासन और राज्य सूचना आयोग से लंबित आवेदनों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
विस्तार
मुरैना। पारदर्शिता और सरकारी कामकाज में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू सूचना का अधिकार कानून को लेकर मुरैना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों का दावा है कि नगर निगम में सूचना के अधिकार के तहत लगाए गए कई आवेदन लंबे समय से लंबित पड़े हैं और आवेदकों को मांगी गई जानकारी के लिए बार-बार निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ताओं के अनुसार, नगर निगम के निर्माण कार्यों, करोड़ों रुपये के टेंडरों, स्वच्छता से जुड़े बजट और अवैध कब्जों पर कार्रवाई सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी मांगते हुए आवेदन लगाए गए हैं। आरोप है कि इनमें से कई आवेदनों का जवाब निर्धारित समय में नहीं दिया गया। आवेदकों का कहना है कि सूचना नहीं मिलने के कारण उन्हें आगे की अपील प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ रहा है।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सामान्य तौर पर लोक सूचना अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध करानी होती है या नियमानुसार सूचना देने से इनकार करने की स्थिति में उसका कारण बताना होता है। हालांकि, मुरैना नगर निगम को लेकर आरटीआई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में यह समय-सीमा पूरी होने के बावजूद जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
आवेदकों का कहना है कि निर्धारित अवधि में सूचना नहीं मिलने पर प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील की जाती है, लेकिन वहां भी कई मामलों में उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है। कुछ मामलों में राज्य सूचना आयोग तक मामला पहुंचने का दावा भी किया जा रहा है। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने आयोग के नोटिस और निर्देशों के अनुपालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
आरटीआई कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड से जुड़ी सूचनाओं को लंबे समय तक लंबित रखना पारदर्शिता की भावना के विपरीत है। हालांकि, नगर निगम अधिकारियों की ओर से संबंधित मामलों में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या यह पुष्टि सामने नहीं आई है कि सभी लंबित आवेदनों के पीछे जानबूझकर जानकारी छिपाने की मंशा है। इसलिए वित्तीय अनियमितताओं या भ्रष्टाचार को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर तथा राज्य सूचना आयोग से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मांग है कि मुरैना नगर निगम में लंबे समय से लंबित सभी आरटीआई आवेदनों की समीक्षा कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि किन मामलों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना नहीं दी गई।
इसके साथ ही मांग की गई है कि यदि जांच में किसी लोक सूचना अधिकारी द्वारा बिना उचित कारण सूचना रोके जाने या आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। आरटीआई कार्यकर्ताओं ने अधिनियम की धारा 20 के तहत लागू होने वाले दंड प्रावधानों पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है।
अब मामला इस बात पर टिका है कि नगर निगम में लंबित बताए जा रहे आरटीआई आवेदनों की स्थिति की प्रशासनिक स्तर पर जांच कब होती है और आवेदकों को उनकी मांगी गई सूचनाएं कब तक उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
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