
सार
बिहार में नदियों के बढ़े जलस्तर के बीच बाढ़ का खतरा बना हुआ है। 12 सितंबर को राज्य के आधिकारिक रियल-टाइम जलस्तर आंकड़ों में पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक, सीतामढ़ी के ढेंग ब्रिज पर बागमती और पटना के कई गेज स्टेशनों पर नदियां चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज की गईं। गंगा के ऊंचे जलस्तर के कारण सहायक नदियों के पानी की निकासी प्रभावित होने से कई इलाकों में बाढ़ का दबाव बढ़ा है।
विस्तार
बिहार में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी और पटना समेत कई जिलों में नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बिहार के आधिकारिक रियल-टाइम फ्लड अलर्ट के अनुसार 12 सितंबर को पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक का जलस्तर 88.87 मीटर दर्ज हुआ, जो चेतावनी स्तर से ऊपर था। सीतामढ़ी के ढेंग ब्रिज पर बागमती का जलस्तर 70.10 मीटर दर्ज किया गया, जबकि पटना के कोल्हाचक में गंगा 55.25 मीटर और दीघा घाट पर 50.94 मीटर दर्ज हुई। दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर था। पटना के श्रीपालपुर में पुनपुन नदी भी खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज की गई।
गंगा के लगातार ऊंचे जलस्तर का असर उसकी सहायक नदियों पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक गंगा में पानी अधिक होने के कारण उसकी सहायक नदियों का पानी तेजी से बाहर निकल नहीं पा रहा है। इसे ‘बैकवॉटर इफेक्ट’ कहा जाता है, जिसके चलते नदियों के किनारे और निचले इलाकों में बाढ़ का दबाव बढ़ सकता है। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे या चेतावनी स्तर के ऊपर दर्ज की गई हैं।
पटना में स्थिति को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। इससे पहले गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर अपने पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर गया था, जिसके बाद निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई थी।
आधिकारिक फ्लड फोरकास्ट में भी पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक और पटना के दीघा घाट समेत कई स्थानों पर नदियों के चेतावनी अथवा खतरे के स्तर से ऊपर रहने की जानकारी दी गई थी। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों, तटबंधों और नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित और नदी किनारे रहने वाले लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने, नदियों और जलमग्न क्षेत्रों के आसपास जाने से बचने तथा किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की गई है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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