
मध्य प्रदेश में पहली बार छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजा को प्रभावी किया गया है। अदालत दोषी को अस्पताल की सफाई, पौधारोपण और सार्वजनिक स्थलों की देखभाल जैसे काम करने का आदेश दे सकती है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में छोटे अपराधों के मामलों में सजा की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब कानून के दायरे में आने वाले कुछ अपराधों में अदालत जेल की सजा के बजाय सामुदायिक सेवा का आदेश दे सकती है। राज्य में इस व्यवस्था को पहली बार प्रभावी किया गया है। यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत लागू है। गृह विभाग की ओर से इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
किन मामलों में मिल सकती है सामुदायिक सेवा
नई व्यवस्था के तहत कुछ छोटे अपराधों में दोषी पाए जाने पर सामुदायिक सेवा का विकल्प लागू हो सकता है। इनमें मानहानि, नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर दुर्व्यवहार, पहली बार की चोरी जिसमें संपत्ति का मूल्य 5 हजार रुपये से कम हो, आत्महत्या का प्रयास और लोक सेवक द्वारा विधि के निर्देश की अवज्ञा जैसे मामले शामिल हैं।
सामुदायिक सेवा की अवधि एक से 60 दिन या 40 से 240 घंटे तक निर्धारित की जा सकती है। सजा तय करते समय अदालत अपराध की प्रकृति के साथ व्यक्ति की उम्र, शारीरिक क्षमता, शिक्षा, कौशल और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे पहलुओं को ध्यान में रख सकती है। निगरानी के लिए जिला परिवीक्षा अधिकारी या सरकार द्वारा नामित अधिकारी की भूमिका होगी।
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अस्पताल से पार्क तक करना होगा सेवा कार्य
सामुदायिक सेवा के तहत दोषी को अलग-अलग सरकारी या सार्वजनिक संस्थानों में काम सौंपा जा सकता है। अस्पतालों में सफाई और रखरखाव, नगर निकायों में सार्वजनिक स्थलों की सफाई, पार्कों की देखभाल और सड़क किनारे खरपतवार हटाने जैसे कार्य कराए जा सकते हैं।
वन विभाग से जुड़े कार्यों में पौधारोपण, पौधों को पानी देना और उनकी देखभाल शामिल हो सकती है। वृद्धाश्रम, छात्रावास, अनाथालय, पशु आश्रय गृह, संग्रहालय और अन्य सामुदायिक संस्थानों में भी सेवा कार्य दिए जा सकते हैं। पुलिस थाना परिसर में सफाई तथा यातायात या भीड़ प्रबंधन में सहयोग जैसे कार्य भी दिशा-निर्देशों में शामिल हैं।
यदि कोई व्यक्ति निर्धारित सामुदायिक सेवा का पालन नहीं करता, तो उसे चेतावनी देने या सेवा की अवधि बढ़ाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में अदालत सामुदायिक सेवा के शेष हिस्से को आदेश में निर्धारित कारावास की सजा में बदल सकती है।
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