
शिवपुरी/ कुलदीप शर्मा: शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग में HOD पद को लेकर चल रहे विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डॉ. शिल्पा अग्रवाल को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने 27 अगस्त 2026 को जारी विवादित प्रशासनिक आदेश के संचालन और क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए डॉ. अग्रवाल को प्रभारी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करने की अनुमति दी है। मामले पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, शिवपुरी के एनेस्थीसिया विभाग में विभागाध्यक्ष पद को लेकर चल रहे विवाद में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने W.P. क्रमांक 37799/2026, डॉ. शिल्पा अग्रवाल विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य मामले में 19 सितंबर 2026 को सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 27 अगस्त 2026 को जारी विवादित प्रशासनिक आदेश के संचालन एवं उसके क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी।
वरिष्ठता और सरकारी नीति का मुद्दा
याचिकाकर्ता डॉ. शिल्पा अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता यशस्वी एस. के. चोकसे और अधिवक्ता नमन एस. इंदौरिया ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष पद से संबंधित प्रशासनिक निर्णय के साथ लागू शासकीय नीति और वरिष्ठता से जुड़े कानूनी पहलुओं को न्यायालय के समक्ष रखा गया।
याचिका में तर्क दिया गया कि विभागाध्यक्ष पद से संबंधित प्रशासनिक निर्णय लेते समय लागू नीति और वरिष्ठता संबंधी प्रावधानों पर उचित तरीके से विचार नहीं किया गया। इन्हीं आधारों पर 27 अगस्त को जारी प्रशासनिक आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
डॉ. शिल्पा अग्रवाल को प्रभारी HOD के रूप में काम करने की अनुमति
मामले में पेश किए गए अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने विवादित प्रशासनिक आदेश के संचालन और क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी।
कोर्ट ने इसके साथ ही डॉ. शिल्पा अग्रवाल को एनेस्थीसिया विभाग की प्रभारी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करने की अनुमति देने के निर्देश दिए हैं। इससे फिलहाल विभागाध्यक्ष पद को लेकर जारी प्रशासनिक विवाद में डॉ. अग्रवाल को राहत मिली है।
प्रतिवादियों को नोटिस, चार सप्ताह में जवाब
हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस की वापसी अवधि चार सप्ताह निर्धारित की गई है। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।
हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा दिया गया आदेश फिलहाल अंतरिम प्रकृति का है। इसका अर्थ है कि अदालत ने अभी मामले का अंतिम निपटारा नहीं किया है। विभागाध्यक्ष पद को लेकर अंतिम स्थिति मामले की आगे होने वाली सुनवाई और न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
फिलहाल अंतरिम आदेश के तहत 27 अगस्त के विवादित प्रशासनिक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक है और डॉ. शिल्पा अग्रवाल को एनेस्थीसिया विभाग की प्रभारी HOD के रूप में कार्य करने की अनुमति मिली है।
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