
धर्मेंद्र सिंह लोधी | टीकमगढ़, 29 सितंबर 2026। संस्कृति विभाग द्वारा बल्देवगढ़ स्थित बलदाऊ जी मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीरामलीला महोत्सव के चतुर्थ दिवस भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े प्रमुख प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। शबरी प्रसंग, श्रीराम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध और लंका दहन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
शबरी प्रसंग और राम-सुग्रीव मैत्री का मंचन
श्रीरामलीला के चौथे दिन कलाकारों ने भगवान श्रीराम और माता शबरी के मिलन का प्रसंग प्रस्तुत किया। अभिनय के माध्यम से शबरी की भक्ति, समर्पण और भगवान श्रीराम के प्रति उनकी आस्था को दर्शाया गया। इस प्रसंग के दौरान दर्शक भाव-विभोर नजर आए। इसके बाद श्रीराम और सुग्रीव की मैत्री तथा बाली वध से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने संवाद और अभिनय के जरिए इन घटनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान दर्शकों ने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
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लंका दहन बना आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में लंका दहन का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। माता सीता की खोज में हनुमान जी के लंका पहुंचने और वहां रावण की लंका में अग्नि प्रज्वलित करने के प्रसंग को कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुत किया। लंका दहन के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। पांच दिवसीय श्रीरामलीला महोत्सव के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, भक्ति, मित्रता, त्याग और मर्यादा से जुड़े प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है। बल्देवगढ़ में आयोजित यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का अवसर बना हुआ है।
श्रीरामलीला महोत्सव के चतुर्थ दिवस शबरी प्रसंग से लेकर राम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध और लंका दहन तक का मंचन किया गया। धार्मिक प्रसंगों ने दर्शकों को भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ा।
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