
नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजों को चुनौती देने वाली याचिका बुधवार को खारिज कर दी। याचिका में चुनाव में गड़बड़ी और विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर ABVP उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने के आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि पेश की गई तस्वीरों से लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होती।
तस्वीरों के आधार पर आरोप साबित नहीं हुए
NSUI उम्मीदवार विजय शंकर मीणा ने अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। उनके वकील ने आरोपों के समर्थन में कुछ तस्वीरें अदालत के सामने रखीं। लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक, जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि तस्वीरों से यह स्पष्ट नहीं होता कि उनमें दिखाई देने वाले लोग दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े थे या चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे थे। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि तस्वीरों पर तारीख और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
कोर्ट के अनुसार, तस्वीरों में दिखाई देने वाले कथित लोगों को याचिका में पक्षकार भी नहीं बनाया गया था। ऐसे में केवल इन तस्वीरों के आधार पर चुनाव में गड़बड़ी या पक्षपात के आरोपों पर विचार करना संभव नहीं था।
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लिंगदोह समिति की सिफारिशों का भी दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता ने विश्वविद्यालय और कॉलेज छात्र चुनावों से संबंधित लिंगदोह समिति की सिफारिशों का भी हवाला दिया था। हालांकि, अदालत ने कहा कि इन सिफारिशों के आधार पर राहत देने के लिए जरूरी तथ्य याचिका में पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखे गए।
कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि याचिकाकर्ता तस्वीरों में दिखाई गई घटनाओं की तारीख और समय स्पष्ट नहीं कर पाया। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की ओर से चार दिन पहले दी गई शिकायत पर जल्द फैसला किया जाएगा। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
क्या था चुनाव परिणाम और याचिका में आरोप?
DUSU चुनाव के परिणाम 19 सितंबर को घोषित हुए थे। याचिका के अनुसार, ABVP के यश डबास ने अध्यक्ष पद पर 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। दोनों के बीच 2,053 वोट का अंतर रहा।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ विश्वविद्यालय और कॉलेज अधिकारियों, प्रिंसिपल और प्रोफेसरों ने ABVP उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया। मतदान प्रतिशत में कथित गड़बड़ी का भी दावा किया गया था। याचिकाकर्ता ने पांच कॉलेजों की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी की थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर चुनाव परिणाम रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की।
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