
भोपाल, 4 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। निजी अस्पताल संगठनों ने चेतावनी दी है कि लंबित भुगतान, क्लेम में कटौती और एनएबीएच प्रमाणपत्र की अनिवार्यता से जुड़ी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया जाएगा। ऐसे में निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने वाले मरीजों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
बकाया भुगतान और क्लेम कटौती बना मुख्य मुद्दा
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज करने के बाद कई अस्पतालों के क्लेम का भुगतान लंबे समय से लंबित है। अस्पताल संगठनों के मुताबिक, कुछ अस्पतालों को पांच से छह महीने से नियमित भुगतान नहीं मिला है, जबकि कुछ मामलों में इससे भी पुरानी राशि अटकी हुई है। भोपाल के कई निजी अस्पतालों ने करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक भुगतान लंबित होने का दावा किया है।
अस्पताल संगठनों का यह भी आरोप है कि उपचार शुरू करने से पहले प्री-ऑथराइजेशन लेने के बावजूद इलाज पूरा होने के बाद तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से क्लेम रिजेक्ट अथवा राशि में कटौती कर दी जाती है। उनका कहना है कि वास्तविक मरीजों के उपचार के बाद क्लेम की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
अस्पताल संचालकों ने प्रत्येक क्लेम रिजेक्शन या कटौती का लिखित कारण बताने, अपील की प्रभावी व्यवस्था बनाने और भुगतान के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग की है।
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1 अक्टूबर से NABH की नई शर्त, अस्पताल संगठनों का विरोध
आयुष्मान भारत निरामयम योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर 2026 से NABH प्रमाणपत्र की शर्त लागू होने की जानकारी सामने आई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में योजना से जुड़े 739 अस्पताल बताए गए हैं। इनमें करीब 310 अस्पतालों के पास NABH प्रमाणपत्र है। सरकारी अस्पतालों को अलग करने पर करीब 300 निजी अस्पतालों की संबद्धता इस नई शर्त से प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
निजी अस्पताल संगठनों का कहना है कि वे मरीजों की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े मानकों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए NABH को अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं है। वे इसे स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था बनाने की मांग कर रहे हैं।
वहीं, आयुष्मान भारत निरामयम के सीईओ अरविंद कुमार शाह के अनुसार NABH की शर्त मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। समयसीमा में बदलाव का फैसला स्टेट एग्जीक्यूटिव कमेटी द्वारा लिया जाएगा।
अस्पताल संगठनों ने कहा है कि यदि 8 अक्टूबर से पहले सरकार के साथ सार्थक बातचीत नहीं होती और मांगों पर लिखित समाधान नहीं मिलता, तो प्रदेशभर में आयुष्मान योजना का बहिष्कार शुरू किया जाएगा। अब इस मामले में सरकार और निजी अस्पताल संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर नजर है।
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