
इंदौर, 4 अक्टूबर 2026: धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होने वाली है। मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में लंबित है। दोनों पक्ष अपनी दलीलों और दस्तावेजों के साथ अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने की तैयारी में हैं। मामले में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट में आगे बढ़ी सुनवाई
भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में संबंधित पक्षों की सहमति के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ को मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हाईकोर्ट को ASI की रिपोर्ट को सार्वजनिक अदालत में खोलकर दोनों पक्षों को उसकी प्रतियां उपलब्ध कराने और उसके बाद पक्षकारों को अपनी आपत्तियां, सुझाव और राय रखने का अवसर देना था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि अंतिम फैसला होने तक भोजशाला-सरस्वती मंदिर और कमाल मौला मस्जिद परिसर के चरित्र में बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही 7 अप्रैल 2003 को ASI के महानिदेशक की ओर से जारी व्यवस्था का पालन जारी रखने के निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद इंदौर खंडपीठ में मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। अप्रैल 2026 में सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुराने सर्वे का हवाला दिया गया था। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से भी अदालत में अपनी दलीलें रखी जा रही हैं।
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दोनों पक्षों की दलीलों पर अदालत में होगी सुनवाई
मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला ऐतिहासिक रूप से मंदिर है। पक्ष की ओर से पूर्व के सर्वे, ऐतिहासिक पुस्तकों और राजस्व रिकॉर्ड सहित विभिन्न दस्तावेजों का हवाला दिया गया है। वहीं मुस्लिम पक्ष इस मामले में अपने कानूनी अधिकार और धार्मिक स्वरूप से जुड़े पक्ष अदालत के सामने रख रहा है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई की प्रक्रिया में स्पष्ट किया है कि पहले याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद प्रतिवादियों और अन्य हस्तक्षेपकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी।
मामला संवेदनशील होने के कारण भोजशाला परिसर और धार में प्रशासन की निगरानी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। फिलहाल अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों पर निर्भर करेगा। अदालत का फैसला आने तक किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।
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