मैहर की रेलवे साइडिंग में धूल प्रदूषण पर सवाल, एसडीएम के निरीक्षण के बाद कार्रवाई की मांग

मैहर। प्रशासनिक अनदेखी से जुड़ी समस्याएं जब लंबे समय तक बनी रहती हैं तो लोगों की नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है। मैहर में केजेएस सीमेंट उद्योग की रेलवे साइडिंग में खुले में सामग्री के रखरखाव और परिवहन को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कोयला, जिप्सम, सीमेंट और अन्य सामग्री को खुले में रखने तथा लोडिंग-अनलोडिंग के कारण आसपास के क्षेत्र में धूल का असर बढ़ रहा है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि धूल के कण घरों तक पहुंच रहे हैं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मामले में प्रशासन से नियमों के पालन और प्रभावी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

रेलवे साइडिंग में खुले में सामग्री रखने पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों की ओर से आरोप लगाया गया है कि रेलवे साइडिंग में विभिन्न सामग्री को खुले आसमान के नीचे उतारने और वहां से परिवहन करने का काम किया जा रहा है। इसके कारण धूल उड़ने की समस्या बढ़ रही है।

इस मामले में पर्यावरणीय मानकों और धूल नियंत्रण की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध पर्यावरणीय दस्तावेजों में केजेएस सीमेंट परियोजना के लिए धूल नियंत्रण के तौर पर जल छिड़काव और अन्य उपायों का उल्लेख है। साथ ही पर्यावरणीय निगरानी के तहत वायु गुणवत्ता की निगरानी किए जाने की बात भी दर्ज है।

एसडीएम के निरीक्षण के बाद बढ़ी कार्रवाई की उम्मीद

स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों के बीच एसडीएम मैहर के मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, निरीक्षण के दौरान साइडिंग में चल रही गतिविधियों और धूल से जुड़ी स्थिति को देखा गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि निरीक्षण के बाद भी तत्काल काम बंद कराने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। वहीं प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया में समय लगने की बात कही जाने का दावा किया गया है।

यही बात अब विवाद का प्रमुख मुद्दा बन गई है। लोगों का सवाल है कि यदि किसी गतिविधि से तत्काल जनस्वास्थ्य पर खतरे की आशंका है तो संबंधित विभाग तत्काल रोकथाम के लिए क्या कदम उठा सकता है।

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वर्षों से चल रही समस्या का समाधान कब?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली धूल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि घरों तक धूल पहुंचने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

हालांकि, प्रदूषण से संबंधित किसी भी आरोप की पुष्टि वैज्ञानिक जांच और सक्षम विभाग की निरीक्षण रिपोर्ट से ही हो सकती है। इसके लिए वायु गुणवत्ता की जांच, साइडिंग की धूल नियंत्रण व्यवस्था, सामग्री के भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया तथा संबंधित पर्यावरणीय अनुमति और शर्तों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

ऐसे मामलों में देश के अन्य हिस्सों में भी रेलवे साइडिंग से होने वाले उड़नशील धूल उत्सर्जन को लेकर नियामक कार्रवाई और पर्यावरणीय जांच हुई है।

जनस्वास्थ्य और उद्योग, दोनों के बीच संतुलन जरूरी

स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही उद्योग की गतिविधियां प्रभावित हुए बिना पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी हो।

अब निगाहें प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि साइडिंग में नियमों का उल्लंघन हुआ है या निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुसार व्यवस्था संचालित की जा रही है।

मैहर रेलवे साइडिंग में धूल और सामग्री के खुले में रखे जाने को लेकर उठे सवालों ने प्रशासन के सामने जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है। अब जरूरी है कि मौके की स्थिति, दस्तावेजों और पर्यावरणीय मानकों की जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट सामने लाई जाए।

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Srota Swati Tripathy

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