विज्ञापन के नाम पर ‘कमीशन का खेल’: मध्य प्रदेश जनसंपर्क और माध्यम विभाग बना लूट का अड्डा!

प्रतिभा नहीं, ‘परसेंटेजतय करता है किसे मिलेगा विज्ञापन और इवेंट का कामएक कड़वा सच!

मध्य प्रदेश की राजनीति मेंभ्रष्टाचारकोई नया शब्द नहीं है, लेकिन जब यह भ्रष्टाचार सूचना और संचार के सबसे बड़े केंद्रोंजनसंपर्क विभाग और माध्यम तक पहुँच जाए, तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की नींव हिलने लगती है। आरोप है कि ये दोनों विभाग अबपब्लिक रिलेशनके नहीं, बल्किपर्सनल कलेक्शनके अड्डे बन चुके हैं। आज हम पर्दाफाश करेंगे उस सिंडिकेट का, जहाँ विज्ञापन और इवेंट प्रोग्राम काबिलियत पर नहीं, बल्किकमीशन की सेटिंगपर बांटे जाते हैं।

1. विज्ञापन नहीं, ‘बोलीलगती है:

मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग, जिसका काम सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाना है, अब वह अखबारों और पोर्टल्स के लिएलूट की मंडीबन गया है। आरोप है कि यहाँ विज्ञापन उसी को मिलता है, जिसकी फाइल के साथकमीशन के लिफाफेका वजन भारी होता है। छोटे अखबार और ईमानदार डिजिटल पोर्टल्स दम तोड़ रहे हैं, क्योंकि वे इसपरसेंटेज कल्चरका हिस्सा नहीं बन पा रहे।

2. ‘माध्यमके इवेंट्स का मायाजाल:

मध्य प्रदेश माध्यम, जो बड़ेबड़े इवेंट्स और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, वहाँ भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। बड़े टेंडर और इवेंट प्रोग्राम उन्हीं कंपनियों को दिए जा रहे हैं, जो विभाग के बाबुओं और बड़े अधिकारियों को भारीभरकमकटदेने को तैयार हैं। सवाल यह है कि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा आखिर किसकी जेब में जा रहा है?

3. ‘देंगे जितना ज्यादा, मिलेगा उतना बड़ावाला फॉर्मूला:

सूत्रों के अनुसार, इन विभागों में एक अघोषित नियम चल रहा है— “जितना ज्यादा परसेंटेज, उतना बड़ा विज्ञापन।जो मीडिया हाउस या इवेंट कंपनी अधिकारियों की मांग को पूरा करती है, उस पर सरकारी खजाने का मुंह खोल दिया जाता है। वहीं, जो इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है, उसकी फाइल फाइलों के ढेर में कहीं गुम हो जाती है।

     क्या जनसंपर्क विभाग अब केवलपसंदीदामीडिया हाउसों की एटीएम मशीन बन गया है?

     माध्यम द्वारा आयोजित इवेंट्स के टेंडर्स में पारदर्शिता क्यों नहीं है?

     प्रतिभाशाली और छोटे पत्रकारों की अनदेखी करपरसेंटेजदेने वालों को ही विज्ञापन क्यों?

     क्या शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकमीशनखोरीकी भनक नहीं है?

यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि उस भरोसे का कत्ल है जो जनता सरकार पर करती है। जनसंपर्क और माध्यम जैसे विभागों का निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल होना प्रदेश के विकास को पीछे धकेल रहा है। अगर समय रहते इस सिंडिकेट को नहीं तोड़ा गया, तो सूचना का माध्यम सिर्फ विज्ञापन बेचने का जरिया बनकर रह जाएगा। अब देखना यह है कि क्या इस पर कोई कार्रवाई होती है याकमीशन का यह खेलयूं ही बदस्तूर जारी रहेगा।

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

    Related Posts

    “सत्कार और स्वार्थ की राजनीति!” – कैलाश विजयवर्गीय के बयान से सियासी भूचाल, संघ पर टिप्पणी से अपनों को ही घेरा?

    मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाकी के लिए…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    वल्लभ भवन की ‘फाइलें’ और ‘डील’, क्या मध्य प्रदेश में स्थानीय प्रतिभाओं के लिए बंद हैं मंत्रालय के दरवाजे?

    वल्लभ भवन की ‘फाइलें’ और ‘डील’, क्या मध्य प्रदेश में स्थानीय प्रतिभाओं के लिए बंद हैं मंत्रालय के दरवाजे?

    पाकिस्तानी बहू से भारत की जासूस बनने तक की कहानी, कैसे बचा INS विक्रांत? जानिए पूरी दास्तान

    पाकिस्तानी बहू से भारत की जासूस बनने तक की कहानी, कैसे बचा INS विक्रांत? जानिए पूरी दास्तान

    ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, 5 सेना और 1 वायुसेना के जवान शामिल

    ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, 5 सेना और 1 वायुसेना के जवान शामिल

    टेलर स्विफ्ट करेंगी ट्रैविस केल्से से शादी? मैडिसन स्क्वायर गार्डन के आसपास सड़कें बंद करने की मांगी गई अनुमति

    टेलर स्विफ्ट करेंगी ट्रैविस केल्से से शादी? मैडिसन स्क्वायर गार्डन के आसपास सड़कें बंद करने की मांगी गई अनुमति

    भारत में महंगे हुए iPad और MacBook, AI बूम के चलते Apple ने बढ़ाईं ₹70,000 तक कीमतें

    भारत में महंगे हुए iPad और MacBook, AI बूम के चलते Apple ने बढ़ाईं ₹70,000 तक कीमतें