
मैदानी विभाग में पदस्थ एक असिस्टेंट कमिश्नर मैडम की किस्मत इन दिनों कुछ ज्यादा ही खराब चल रही है। मैडम का लंबे समय से समयमान-वेतनमान का मामला अटका हुआ था। इसके लिए बैठक तक नहीं हो पा रही थी। आखिरकार मैडम ने राजधानी की दौड़-भाग शुरू की और अफसरों से गुहार लगाते हुए किसी तरह बैठक की तारीख तय करवा ली। बैठक की तारीख मिलते ही मैडम की खुशी का ठिकाना नहीं था। उम्मीद थी कि अब मामला सुलझ जाएगा और जल्द ही बढ़े हुए वेतन का लाभ मिलने लगेगा।
लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। बैठक होने से पहले ही मैडम के जिले में एक बड़ी घटना हो गई और सरकार ने कार्रवाई करते हुए मैडम को निलंबित कर दिया। अब स्थिति यह है कि जिस बैठक के लिए मैडम ने इतनी भागदौड़ की थी, वह तो होगी, लेकिन मैडम खुद उसका फायदा उठाने की स्थिति में नहीं रहेंगी। समयमान-वेतनमान का मामला उनके लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण था और इसके लिए राजधानी तक दौड़ लगानी पड़ी थी।
मैडम को उम्मीद थी कि बैठक के बाद उनके अटके हुए मामले का रास्ता साफ होगा और बढ़े हुए वेतन का लाभ मिल सकेगा, लेकिन निलंबन के बाद पूरा घटनाक्रम ही बदल गया। अब बैठक में मैडम की मौजूदगी नहीं होगी और जिस लाभ की उम्मीद में उन्होंने इतनी भागदौड़ की थी, उसका फायदा फिलहाल उन्हें नहीं मिल पाएगा। यही वजह है कि महकमे में मैडम की किस्मत को लेकर चर्चा हो रही है।
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