
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए गांवों में चल रहे ईंट-भट्ठों, निजी स्कूलों, मोबाइल टावरों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से टैक्स वसूलने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबों पर कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले पांच वर्षों में पंचायतों के विकास कार्यों के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
बिहार में ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने स्थानीय स्तर पर राजस्व जुटाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना के होटल ताज में आयोजित ‘ग्राम संसद, बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंचायतों को गांवों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों से टैक्स वसूलने का फॉर्मूला बताया।
ईंट-भट्ठे और निजी स्कूल भी टैक्स के दायरे में
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में चल रहे ईंट-भट्ठों, निजी स्कूलों, मोबाइल टावरों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से पंचायतों को टैक्स वसूलना चाहिए। इससे पंचायतों की अपनी आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
सम्राट चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य गरीबों पर नया बोझ डालना नहीं है। उनके अनुसार, गरीबों पर कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा। व्यावसायिक गतिविधियों से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल गांवों में कचरा प्रबंधन, पेयजल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में किया जा सकेगा।
पंचायतों को मिलेगा एक लाख करोड़ से अधिक का फंड
मुख्यमंत्री ने पंचायतों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने का भी भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में बिहार की पंचायतों को करीब 52 हजार करोड़ रुपये देगी।
इसके अलावा विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 47 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे। इसमें 40 प्रतिशत राशि राज्य और 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार की ओर से वहन की जाएगी।
इस तरह अगले पांच वर्षों में पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से विकास कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
मुखिया को अपनी पंचायत की ‘GDP’ का रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए
सम्राट चौधरी ने पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह देश और राज्य के स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का आकलन किया जाता है, उसी तरह मुखिया, प्रखंड प्रमुख और जिला परिषद को भी अपनी पंचायत की ‘जीडीपी’ का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पंचायतों को जमीनी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण इकाई बताते हुए जनप्रतिनिधियों से विकास कार्यों की जिम्मेदारी लेने की अपील की।
नए परिसीमन के बाद होंगे पंचायत चुनाव
मुख्यमंत्री ने पंचायतों के वर्तमान स्वरूप में बदलाव की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार करीब 7,500 की आबादी पर एक पंचायत होनी चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर 20 हजार तक की आबादी और कई गांवों को मिलाकर एक पंचायत संचालित हो रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगामी पंचायत चुनाव इसी परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बार-बार ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निकायों में शामिल किए जाने की व्यवस्था पर भी रोक लगाने की बात कही, ताकि पंचायत क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित न हों।
पंचायतों में बनेगा अलग इंजीनियरिंग सेल
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी के लिए पंचायती राज विभाग में अलग इंजीनियरिंग सेल बनाने का निर्देश भी दिया गया है। मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से अपनी-अपनी पंचायत में कम से कम 10 प्रमुख योजनाओं को प्राथमिकता देने को कहा।
इनमें स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और लंबे समय से उपेक्षित सामुदायिक भवनों के जीर्णोद्धार जैसे कार्य शामिल करने की बात कही गई।
इस पहल के तहत पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं के विकास और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की योजना सामने आई है।
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