सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाली डेल्हा मोड़ की मुख्य सड़क बदहाल, टोल वसूली और सीमेंट उद्योगों की भारी आवाजाही पर उठे सवाल

मैहर/देवेश शर्मा की खास रिपोर्ट: जिले में सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाली डेल्हा मोड़ की मुख्य सड़क लंबे समय से बदहाली का सामना कर रही है। सड़क की खराब स्थिति के कारण स्थानीय ग्रामीणों और इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और खराब हो जाने से आवागमन मुश्किल हो जाता है।

सड़क की बदहाली को लेकर अब एमपीआरडीसी, केजेएस, प्रिज्म और अल्ट्राटेक सीमेंट उद्योग की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क पर नियमित रूप से टोल वसूली की जाती है तो सड़क के रखरखाव और निर्माण की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

टोल बैरियर को लेकर पहले भी उठ चुका है सवाल

इसी सड़क पर लगे एमपीआरडीसी के टोल बैरियर को लेकर मैहर जिले में आयोजित एक बैठक के दौरान सांसद गणेश सिंह ने तत्कालीन कलेक्टर से सवाल किया था कि यह टोल बैरियर किस आधार पर संचालित हो रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया गया कि यदि टोल बैरियर की वैधता को लेकर सवाल था, तो उसके संचालन की स्थिति अब तक स्पष्ट क्यों नहीं हुई। अब सड़क की खराब हालत के बीच टोल वसूली का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। सवाल यह है कि यदि सड़क के उपयोग के लिए शुल्क लिया जा रहा है तो उसके रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।

सीमेंट उद्योगों के भारी वाहनों की आवाजाही भी सवालों के घेरे में

डेल्हा मोड़ की सड़क से अल्ट्राटेक, प्रिज्म और केजेएस सीमेंट उद्योगों से जुड़े भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों के लगातार आवागमन से सड़क पर दबाव बढ़ता है और सड़क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन औद्योगिक इकाइयों के भारी वाहन इस मार्ग का नियमित उपयोग करते हैं, क्या वे सड़क के मजबूत और स्थायी निर्माण में सहयोग नहीं कर सकतीं? स्थानीय स्तर पर करीब 100 मीटर सड़क के मजबूत निर्माण की मांग भी सामने आ रही है।

वर्षों से परेशानी झेल रहे ग्रामीण

डेल्हा सहित आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से सड़क की स्थिति खराब होने के बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क सैकड़ों गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद इसकी मरम्मत और मजबूतीकरण को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

आखिर जिम्मेदारी किसकी?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि डेल्हा मोड़ की बदहाल सड़क के लिए जिम्मेदार कौन है? यदि सड़क एमपीआरडीसी के अधीन है तो उसकी मरम्मत और रखरखाव कौन करेगा? यदि सड़क पर टोल वसूली की जा रही है तो उसके बदले सड़क को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी किसकी है?

वहीं, यदि भारी औद्योगिक वाहनों की वजह से सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही है तो संबंधित सीमेंट उद्योगों की जिम्मेदारी भी तय किए जाने की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनहित से जुड़े इस मामले में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, एमपीआरडीसी और संबंधित उद्योगों को आपसी समन्वय से स्थायी समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क की मरम्मत केवल अस्थायी तौर पर करने के बजाय मजबूत और टिकाऊ निर्माण कराया जाना जरूरी है।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मैहर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कराएंगे। सड़क की वास्तविक स्थिति, टोल वसूली की वैधता, सड़क रखरखाव की जिम्मेदारी और भारी वाहनों से होने वाले नुकसान की तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

 

अब देखना यह होगा कि डेल्हा मोड़ की इस महत्वपूर्ण सड़क को लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल सैकड़ों गांवों को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली के बीच टोल वसूली, एमपीआरडीसी की जिम्मेदारी और सीमेंट उद्योगों के भारी वाहनों की आवाजाही तीनों मुद्दे सवालों के घेरे में हैं।

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    Rashel Kachwah Rajput

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