
सार:
सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। हाल के दिनों में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 3 प्रतिशत तक फिसली, जबकि चांदी भी साढ़े तीन प्रतिशत के आसपास टूट गई। घरेलू बाजार में भी इसका असर देखने को मिला और निवेशकों के बीच यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर सोने-चांदी में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई और क्या अब खरीदारी का मौका बन रहा है?
सोने और चांदी में ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें हैं। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की टिप्पणियों के बाद बाजार में यह आशंका मजबूत हुई कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में सख्ती करनी पड़ सकती है।
विस्तार:
वॉर्श ने संकेत दिया कि अगर महंगाई 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर पर्याप्त रूप से नहीं लौटती है तो फेड को आगे भी कार्रवाई करनी पड़ सकती है। इसके बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की बाजार संभावना तेजी से बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, फेड की सितंबर बैठक में दर बढ़ने की संभावना 36 प्रतिशत से बढ़कर करीब 58 प्रतिशत तक पहुंच गई।
सोना और चांदी ऐसे निवेश हैं जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाली संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं।
यही वजह है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ते ही निवेशक कीमती धातुओं में मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं। इसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।
अमेरिकी फेड के सख्त रुख के साथ डॉलर में भी मजबूती आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है। ऐसे में डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं।
इससे मांग पर दबाव पड़ सकता है और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है। शुक्रवार को डॉलर के मजबूत होने ने भी सोने की तेजी पर ब्रेक लगाने में अहम भूमिका निभाई।
गिरावट से पहले सोने ने अगस्त में जबरदस्त तेजी दिखाई थी। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,696 डॉलर प्रति औंस के तीन महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में तेज मुनाफावसूली शुरू हुई।
शुक्रवार की गिरावट के बाद स्पॉट गोल्ड करीब 4,567 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी लगभग 2.9 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इस तरह कुछ ही दिनों में सोने ने अपने हालिया उच्च स्तर से अच्छी-खासी गिरावट दर्ज की।
सोने के साथ चांदी भी बिकवाली की चपेट में आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब 3.5 प्रतिशत गिरकर 66.81 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई।
चांदी में आमतौर पर सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसकी वजह यह है कि चांदी केवल निवेश के लिए ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी इस्तेमाल होती है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और निवेशकों के सेंटीमेंट में बदलाव का असर चांदी पर तेजी से पड़ सकता है।
सोने की कीमतों में गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है। इसका सीधा जवाब देना मुश्किल है, क्योंकि बाजार अभी अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, महंगाई और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।
मौजूदा गिरावट को केवल इस आधार पर सोने की लंबी अवधि की कहानी खत्म होने का संकेत नहीं माना जा सकता। सोने को अब भी महंगाई, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के खिलाफ सुरक्षित निवेश माना जाता है।
हालांकि, अचानक आई तेजी के बाद एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय निवेशकों के लिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अपेक्षाकृत बेहतर रणनीति हो सकती है। खासकर तब, जब कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी काफी ज्यादा है।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी फेड की नीतियों और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहने वाली है। अगर अमेरिकी महंगाई और आर्थिक आंकड़े फेड को सख्त रुख बनाए रखने के लिए मजबूर करते हैं, तो कीमती धातुओं पर और दबाव आ सकता है।
वहीं अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत मिलते हैं और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद दोबारा मजबूत होती है, तो सोने को फिर से समर्थन मिल सकता है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में भी सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ सकती है।
इसलिए मौजूदा गिरावट को बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में गोल्ड फ्यूचर्स करीब 3.25 प्रतिशत साप्ताहिक गिरावट के साथ 4,478.10 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि सिल्वर करीब 3.65 प्रतिशत नीचे रहा।
फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे केवल एक-दो दिन की गिरावट या तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें। सोना-चांदी इस समय वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर और आर्थिक नीतियों के प्रति बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और फेड के अगले संकेत यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि मौजूदा गिरावट अस्थायी करेक्शन है या कीमती धातुओं में एक बड़े ट्रेंड बदलाव की शुरुआत।
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